श्रावणी मेले के बाद भादो-अद्वैया मेला की तैयारी तेज, देवघर में 12 DSP तैनात

देवघर में भादो और अद्वैया मेला को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. झारखंड पुलिस मुख्यालय ने DSP रैंक के 12 अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की है.

श्रावणी मेले के बाद भादो-अद्वैया मेला की तैयारी तेज, देवघर में 12 DSP तैनात

DEOGHAR:राजकीय श्रावणी मेला 2026 के सफल समापन के बाद अब देवघर में होने वाले भादो और अद्वैया मेला को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया है. श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए झारखंड पुलिस मुख्यालय ने देवघर जिले में DSP रैंक के 12 अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की है. यह निर्णय देवघर के एसपी की ओर से किए गए अनुरोध के बाद लिया गया है.

पुलिस मुख्यालय की ओर से जिन अधिकारियों को देवघर भेजा गया है, उनमें प्रदीप उरांव, महेश प्रजापति, संदीप सुमन, चंदन कुमार वत्स, अशोक रविदास, रजत माणिक बाखला, वरुण देवगम, अरविन्द कुमार सिन्हा, राजा कुमार मित्रा, आनंद ज्योति मिंज, विजय कुमार कुशवाहा और पवन कुमार-2 शामिल हैं. सभी अधिकारियों को मेला अवधि के दौरान जिले में सुरक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालनी होंगी.

भादो और अद्वैया मेला के दौरान देवघर में देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है. ऐसे में भीड़ को नियंत्रित करने, यातायात व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गई है. प्रतिनियुक्त DSP जिला पुलिस के साथ समन्वय कर सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करेंगे.

मेला अवधि के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही वाले प्रमुख स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती जाएगी. पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी से भीड़ प्रबंधन के साथ-साथ कानून व्यवस्था बनाए रखने में जिला पुलिस को अतिरिक्त सहयोग मिलेगा. प्रशासन का उद्देश्य मेला के दौरान श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुचारू वातावरण उपलब्ध कराना है.

पुलिस मुख्यालय ने देवघर एसपी को जारी आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि प्रतिनियुक्त किए गए सभी DSP को मेला समाप्त होने से पहले उनके मूल पदस्थापना स्थल पर वापस नहीं भेजा जाएगा. भादो और अद्वैया मेला के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद ही उन्हें उनके मूल स्थान पर लौटाया जाएगा.

इस व्यवस्था के तहत मेला अवधि तक देवघर में अतिरिक्त पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी बनी रहेगी. इससे किसी भी आपात स्थिति से निपटने और सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है.