आस्था के साथ एकता और भाईचारे का संदेश, जानें क्यों शुभ कार्य से पहले होती है गणपति की पूजा

पर्यावरणविद, डाक टिकट संग्रहकर्ता और पक्षी विशेषज्ञ रजत मुखर्जी ने गणेश चतुर्थी को आस्था के साथ सामाजिक एकता और भाईचारे का पर्व बताया है. उन्होंने कहा कि गणेश उत्सव लोगों को संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने के साथ मिलजुल कर रहने और सकारात्मक सोच का संदेश देता है.

आस्था के साथ एकता और भाईचारे का संदेश, जानें क्यों शुभ कार्य से पहले होती है गणपति की पूजा

देवघर (DEOGHAR): पर्यावरणविद, डाक टिकट संग्रहकर्ता और पक्षी विशेषज्ञ रजत मुखर्जी ने गणेश चतुर्थी के महत्व को बताते हुए इसे आस्था के साथ सामाजिक एकता और भाईचारे का पर्व बताया है. उनका कहना है कि गणेश उत्सव लोगों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने के साथ मिलजुल कर रहने का संदेश भी देता है.

शुभ कार्य से पहले होती है गणपति की पूजा

हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, मंगलकर्ता और बुद्धि का देवता माना गया है. यही कारण है कि किसी भी शुभ काम की शुरुआत से पहले भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है. गणेश चतुर्थी भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है.

इस दिन घरों से लेकर सार्वजनिक पंडालों तक भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं. भक्त सुबह और शाम पूजा-अर्चना करते हैं. गणपति को मोदक, लड्डू, फल और मिठाइयों का भोग लगाया जाता है. लोग बप्पा से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं.

कई राज्यों में दिखती है खास रौनक

गणेश चतुर्थी की सबसे ज्यादा धूम महाराष्ट्र में देखने को मिलती है. इसके अलावा कर्नाटक, गोवा और आंध्र प्रदेश समेत देश के दूसरे हिस्सों में भी इसे उत्साह के साथ मनाया जाता है. बड़े-बड़े पंडाल सजते हैं और भजन, आरती के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.

विसर्जन के साथ बप्पा को विदाई

उत्सव के आखिरी दिन गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है. भक्त ढोल-नगाड़ों और “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयकारों के साथ बप्पा को विदाई देते हैं.

रजत मुखर्जी के मुताबिक, गणेश चतुर्थी केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है. यह लोगों को एक साथ जोड़ने, प्रेम और भाईचारा बढ़ाने के साथ जीवन में सकारात्मक सोच बनाए रखने की प्रेरणा भी देता है.

देवघर - प्रशांत कुमार