चतरा मंडल कारा में टीएसपीसी उग्रवादी की मौत से हड़कंप, परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप

चतरा मंडल कारा में करीब दो वर्षों से बंद टीएसपीसी उग्रवादी मंटू गंझू की मौत हो गई. जेल प्रशासन ने फांसी लगाने के प्रयास की बात कही है, जबकि परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया है.

चतरा मंडल कारा में टीएसपीसी उग्रवादी की मौत से हड़कंप, परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप

चतरा (CHATRA): चतरा मंडल कारा में करीब दो वर्षों से आर्म्स एक्ट के मामले में बंद टीएसपीसी उग्रवादी मंटू गंझू उर्फ दिलेश सिंह की मौत के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है. दरअसल, जेल प्रशासन के अनुसार, मंटू ने फांसी लगाने का प्रयास किया था. तबीयत बिगड़ने के बाद उसे सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया. वहीं, परिजनों ने इस दावे को खारिज करते हुए जेल प्रशासन पर सुनियोजित हत्या का गंभीर आरोप लगाया है. मंटू पलामू के मनातू थाना क्षेत्र स्थित केदल गांव का रहने वाला था. घटना के बाद जिला प्रशासन की निगरानी में मेडिकल बोर्ड गठित कर पोस्टमार्टम कराया गया.

वहीं मृतक के भाई संटू सिंह ने सदर थाना प्रभारी को आवेदन देकर काराधीक्षक, कक्षपाल समेत अन्य जेलकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की है. परिजनों का आरोप है कि कुछ दिन पहले मंटू ने जेल के फोन से बातचीत के दौरान प्रताड़ित किए जाने और दो लाख रुपये मांगने की बात बताई थी. 16 अगस्त की सुबह करीब 9:30 बजे परिवार को उसकी तबीयत खराब होने की सूचना दी गई. अस्पताल पहुंचने पर मंटू की मौत की जानकारी मिली. परिजनों ने शव पर गले और शरीर के अन्य हिस्सों में चोट के निशान होने का दावा किया. इसी आधार पर उन्होंने पहले शव लेने से इनकार कर दिया और निष्पक्ष जांच की मांग की. बाद में समझाने के बाद रविवार रात शव ले जाया गया.

मंटू की मौत ने जेल की निगरानी और आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. यदि जेल प्रशासन के अनुसार उसने आत्महत्या का प्रयास किया, तो कड़ी निगरानी के बावजूद उसे ऐसा अवसर कैसे मिला, इसकी जांच जरूरी है. वहीं, परिजनों के आरोप सही पाए जाने पर मामला और गंभीर हो सकता है. पुलिस ने फिलहाल यूडी केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. सदर थाना प्रभारी अनिल उरांव के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. घटना से पहले और बाद की गतिविधियों की जांच के लिए सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी रजिस्टर, मेडिकल रिकॉर्ड और जेल अभिलेखों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है.