चतरा: दो बच्चों के पिता से नाबालिग की जबरन कराई जा रही थी शादी, बारात आने से पहले हुआ कुछ ऐसा की.....

चतरा के बिचकिला गांव में नाबालिग की शादी की तैयारी को प्रशासन ने समय रहते रोक दिया. दो बच्चों के पिता से शादी की तैयारी थी, लेकिन सीओ की कार्रवाई के बाद दूल्हा वापस लौट गया.

चतरा: दो बच्चों के पिता से नाबालिग की जबरन कराई जा रही थी शादी, बारात आने से पहले हुआ कुछ ऐसा की.....

चतरा (CHATRA): प्रतापपुर थाना क्षेत्र की मोनिया पंचायत के बिचकिला गांव में नाबालिग लड़की की शादी कराने की तैयारी का मामला सामने आया है. आरोप है कि लड़की की इच्छा के खिलाफ उसकी मां और दादा उसकी शादी दो बच्चों के पिता से कराने पर अड़े थे. शादी के लिए बारात आने वाली थी, लेकिन समय रहते प्रशासन को इसकी जानकारी मिल गई. इसके बाद मौके पर पहुंचकर अधिकारियों ने परिजनों को बाल विवाह के कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी और शादी रोक दी.

मामले की भनक लगने के बाद ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों को इसकी सूचना दी. इसके बाद मोनिया पंचायत के मुखिया अमरेश सिंह और घोरीघाट मंडल अध्यक्ष रामाशंकर गुप्ता नाबालिग के घर पहुंचे. दोनों ने परिवार को समझाने की कोशिश की और कहा कि लड़की अभी शादी की उम्र में नहीं है. जनप्रतिनिधियों ने परिजनों को कम उम्र में विवाह से होने वाले नुकसान के बारे में बताया. उनका कहना था कि बाल विवाह से लड़की की पढ़ाई प्रभावित होने के साथ उसके भविष्य पर भी गंभीर असर पड़ सकता है. हालांकि, समझाने के बावजूद नाबालिग की मां और दादा शादी कराने के फैसले पर कायम रहे.

बताया जा रहा है कि शुक्रवार को नाबालिग की शादी के लिए बारात आने वाली थी. इसी बीच मामले की जानकारी प्रतापपुर के अंचल अधिकारी विकास कुमार टुडू को मिली. सूचना मिलते ही सीओ टीम के साथ बिचकिला गांव पहुंचे और परिजनों को शादी नहीं कराने की स्पष्ट चेतावनी दी. अधिकारी ने परिवार को बताया कि नाबालिग की शादी कराना या उसमें किसी तरह की मदद करना कानूनन अपराध है. उन्होंने परिजनों से लड़की की इच्छा के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाने को कहा.

प्रशासन की कार्रवाई और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी का असर भी देखने को मिला. जब संभावित दूल्हे को पूरे मामले की जानकारी मिली, तो उसने शादी से पीछे हटने का फैसला किया. बताया गया कि दो बच्चों का पिता दूल्हा शुक्रवार की रात ही वापस लौट गया. इस तरह बारात पहुंचने से पहले ही शादी की तैयारी रुक गई और नाबालिग का बाल विवाह होने से बच गया.

सीओ विकास कुमार टुडू ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में जागरूकता और शिक्षा की कमी के कारण आज भी बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियां देखने को मिलती हैं. उन्होंने लोगों से बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को प्राथमिकता देने की अपील की. उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल विवाह कराने, उसमें सहयोग करने या इसके लिए दबाव बनाने वालों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है. प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद गांव में बाल विवाह को लेकर चर्चा तेज है. वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है.