चाईबासा (CHAIBASA): झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पश्चिमी सिंहभूम के तीन दिवसीय दौरे पर है. इस दौरान राज्य सरकार पर जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया. चाईबासा में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खदान प्रभावित क्षेत्रों के विकास के उद्देश्य से DMFT फंड की व्यवस्था की थी, लेकिन झारखंड में इसका लाभ स्थानीय लोगों तक नहीं पहुंचा. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और प्रशासन के संरक्षण में इस फंड की बंदरबांट हुई है. मरांडी ने कहा कि उनके दौरे के दौरान पेयजल, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी समस्याएं आज भी जस की तस हैं. उन्होंने सरकार से DMFT फंड पर श्वेत पत्र जारी कर खर्च का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की.
मरांडी ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में चाईबासा जिले को DMFT के तहत 3,742.15 करोड़ रुपये मिले, जिनमें से 75.68 प्रतिशत राशि खर्च भी कर दी गई, लेकिन खदान प्रभावित इलाकों में विकास दिखाई नहीं देता. उन्होंने इसे आर्थिक अपराध बताते हुए कहा कि खर्च का पूरा विवरण DMFT पोर्टल पर अपलोड नहीं किया गया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं. उन्होंने मीडिया से भी इस मामले की जांच करने और जिला प्रशासन से खर्च का ब्यौरा मांगने की अपील की. उनके अनुसार, यदि राशि सही तरीके से खर्च होती तो क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं का समाधान हो चुका होता.
नेता प्रतिपक्ष ने झारखंड सरकार पर खनन क्षेत्र की उपेक्षा का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि राज्य में खदानों की नीलामी नहीं होने से रोजगार के अवसर घटे हैं और युवाओं का पलायन बढ़ा है. उन्होंने ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां बड़ी संख्या में खदानों की नीलामी हुई, जिससे राजस्व और रोजगार दोनों बढ़े. मरांडी ने कहा कि झारखंड में खनिज संसाधन अधिक होने के बावजूद सरकार उनकी क्षमता का लाभ नहीं उठा पा रही है. उन्होंने निवेश के नाम पर विदेश दौरों और एमओयू पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इनका जमीनी स्तर पर कोई प्रभाव दिखाई नहीं देता.

