नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन ‘नवजीवन-III’ सफल, 10 लाख के इनामी समेत 4 ने छोड़ा हथियार

नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन ‘नवजीवन-III’ सफल, 10 लाख के इनामी समेत 4 ने छोड़ा हथियार

CHAIBASA:पश्चिमी सिंहभूम के चाईबासा में नक्सल विरोधी अभियान के बीच सुरक्षा बलों को एक और बड़ी सफलता मिली है. महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक, झारखंड के निर्देश पर झारखंड पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बल और झारखंड जगुआर की संयुक्त टीम लगातार कोल्हान, पोड़ाहाट और सारंडा के जंगल-पहाड़ी इलाकों में अभियान चला रही है. इसी के साथ भटके हुए नक्सलियों को हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने के लिए सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति की जानकारी भी दी जा रही है.

इसी अभियान के तहत 11 अगस्त 2026 को ऑपरेशन “नवजीवन-III” के दौरान भाकपा (माओवादी) संगठन से जुड़े चार सक्रिय नक्सलियों ने पुलिस और CRPF के समक्ष आत्मसमर्पण किया. सभी ने संगठन छोड़कर सामान्य जीवन में वापस लौटने का निर्णय लिया है.

इससे पहले भी पश्चिमी सिंहभूम में आत्मसमर्पण अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं. वर्ष 2025 में 10 नक्सलियों ने चाईबासा पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर सरकार की पुनर्वास योजना का लाभ लिया था. वहीं ऑपरेशन “नवजीवन-I” के तहत 21 मई 2026 को 27 नक्सली कमांडर और दस्ते के सदस्यों ने हथियार डाले थे. इनमें 25 नक्सली चाईबासा क्षेत्र से थे. इस दौरान सुरक्षा बलों ने 16 हथियार और 3,082 कारतूस बरामद किए थे.

इसके बाद 28 जुलाई 2026 को ऑपरेशन “नवजीवन-II” के तहत 14 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया. उनके कब्जे से 10 हथियार और 1,412 गोलियां बरामद की गई थीं. आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 में जुलाई तक पश्चिमी सिंहभूम में कुल 49 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. इसी अवधि में पुलिस के साथ मुठभेड़ में 22 नक्सली मारे गए, जबकि 60 को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया.

11 अगस्त को आत्मसमर्पण करने वालों में सालुका कायम उर्फ भुवनेश्वर समेत कई नाम शामिल हैं. सालुका को भाकपा (माओवादी) की जोनल कमेटी का सदस्य बताया गया है और उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था. पुलिस के अनुसार उसके खिलाफ चाईबासा में 90 और सरायकेला में 6, यानी कुल 96 मामले दर्ज हैं. आत्मसमर्पण के दौरान उसके पास से एक AK-47 राइफल, दो मैगजीन, 843 राउंड कारतूस और अन्य सामान बरामद किया गया.

अन्य आत्मसमर्पित नक्सलियों में कोदोमुनी कोड़ा, पिंकी पूर्ती और अनिता तामसोय शामिल हैं. इन सभी के खिलाफ चाईबासा और सरायकेला क्षेत्र में विभिन्न मामले दर्ज बताए गए हैं.

पुलिस के मुताबिक लगातार अभियान, संगठन के भीतर कथित शोषण और नक्सली गतिविधियों से मोहभंग के कारण कई सदस्य हथियार छोड़ रहे हैं. वहीं सामुदायिक पुलिसिंग के तहत ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य शिविर और अन्य जनकल्याणकारी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. इससे स्थानीय लोगों और सुरक्षा बलों के बीच भरोसा मजबूत हुआ है. पुलिस का कहना है कि आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति हिंसा छोड़कर सम्मानजनक जीवन शुरू करने के इच्छुक लोगों के लिए एक नया अवसर उपलब्ध करा रही है.