चाईबासा (CHAIBASA): डिजिटल युग में इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क आज लोगों की बुनियादी जरूरत बन चुके हैं, लेकिन पश्चिम सिंहभूम के एक दूरस्थ आदिवासी गांव में आज भी संचार सुविधाओं का गंभीर अभाव है. चारों तरफ पहाड़ियों से घिरे इस गांव में किसी भी मोबाइल कंपनी का नेटवर्क ठीक से काम नहीं करता, जिससे ग्रामीणों को फोन कॉल करने या इंटरनेट का इस्तेमाल करने के लिए करीब दो किलोमीटर दूर तक जाना पड़ता है. कई बार बेहतर सिग्नल पाने के लिए लोगों को पहाड़ी पर चढ़ने की भी मजबूरी होती है.
गांव में वर्षों से बनी इस समस्या को देखते हुए ग्रामीण लाक्षुराम मुंडरी ने खुद समाधान खोजने की पहल की. उन्होंने बताया कि देश के कई दूरदराज क्षेत्रों में यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (USOF) के तहत मोबाइल नेटवर्क की सुविधा पहुंचाई गई है, लेकिन उनका गांव अब भी इस सुविधा से वंचित है. नेटवर्क की कमी के कारण ग्रामीणों को शिक्षा, संचार और ऑनलाइन सेवाओं तक पहुंचने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
स्थिति से निराश होने के बजाय लाक्षुराम ने तकनीक का सहारा लिया. उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से एक 4G वाई-फाई राउटर और हाई-गेन LPDA एंटीना मंगवाया. इसके बाद गांव में एक ऊंचे बांस के सहारे एंटीना को स्थापित किया और उसे केबल के जरिए राउटर से जोड़ दिया. इस तकनीकी प्रयोग का परिणाम उम्मीद से कहीं बेहतर निकला.
नई व्यवस्था शुरू होने के बाद उनके घर में लगभग 20 Mbps तक की इंटरनेट स्पीड मिलने लगी. अब परिवार के सदस्य घर बैठे इंटरनेट का उपयोग कर पा रहे हैं. गांव के अन्य लोग भी इस नवाचार को देखकर प्रभावित हैं और इसे ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं के समाधान का एक प्रेरणादायक उदाहरण मान रहे हैं.
लाक्षुराम का कहना है कि यदि गांव में स्थायी रूप से मोबाइल टावर या बेहतर नेटवर्क सुविधा उपलब्ध हो जाए तो बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई, सरकारी सेवाओं तक पहुंच और ग्रामीणों के संचार में बड़ा बदलाव आ सकता है. ग्रामीणों ने भी सरकार से मांग की है कि उनके गांव को जल्द से जल्द मजबूत मोबाइल नेटवर्क से जोड़ा जाए, ताकि डिजिटल भारत की सुविधाएं दूरस्थ आदिवासी इलाकों तक भी पहुंच सकें.