चाईबासा (CHAIBASA): 10 लाख के इनामी नक्सली जोनल कमेटी का सदस्य सालुका कायम ने हथियार डाल दिया है. उसने 2 महिला नक्सली पिंकी और कोदोमुनि कोड़ा उर्फ पद्मिनी के साथ हथियार छोड़ा. तीनों ने पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया है. इनके सरेंडर करने से पश्चिम सिंहभूम जिला अब नक्सल मुक्त बताया जा रहा है. मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी और कई नक्सलियों के सरेंडर करने के बाद पश्चिम सिंहभूम जिले में सालुका कायम ही एकमात्र बड़ा नक्सली बच गया था. लेकिन अब उसने भी हथियार डाल दिए. सालुका कायम कई वर्षों से सारंडा, पोड़ाहाट और कोल्हान के जंगलों में सक्रिय था. सुरक्षाबलों की लगातार दबिश के कारण वह हथियार छोड़ने पर विवश हुआ. पुलिस के अनुसार सालुका कायम पर 96 मामले दर्ज हैं. जबकि सरेंडर करने वाली नक्सली पिंकी पर आठ और कोदोमुनि पर पांच मामले दर्ज है. इनके सरेंडर करने को लेकर पुलिस आज खुलासा कर सकती है.
स्कूल के दिनों से ही संगठन से जुड़ा
सलुका कायम पश्चिम सिंहभूम जिले के सोनुआ का रहने वाला है. वह स्कूल के दिनों से ही नक्सली संगठन से जुड़ गया था. सालुका ने कराईकेला, टोकलो, गोइलकेरा, टेबो, बंदगांव समेत कई थाना क्षेत्रों में आईईडी विस्फोट, हत्या जैसी घटनाओं को अंजाम दे चुका है. सरकार ने उसपर 10 लाख रुपए का इनाम रखा था. 1 मार्च 2006 को मनोहरपुर में सुरक्षाबलों के साथ हुई मुठभेड़ में सालुका की सक्रिय भूमिका रही थी. इसमें कई जवान घायल हुए थे. इसके अलावा अप्रैल 2025, अगस्त 2025, जनवरी 2021, 2023 में हुए आईईडी विस्फोट में भी उसका नाम आया था.
मिसिर की गिरफ्तारी के बाद तनाव में था
बताया जा रहा है कि 2 करोड़ के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के बाद से सालुका कायम तनाव और दवाब में था. सालुका मिसिर बेसरा का सबसे खास बताया जा रहा है. सालुका दस्ते में नए कैडरों की भर्ती, लेवी वसूली, सुरक्षित ठिकानों की व्यवस्था और संगठन के मैसेज को अन्य ठिकानों तक पहुंचाता था. सालुका कायम का सरेंडर करना संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. सुरक्षाबलों को लगातार दबिश और संगठन का लगातार कमजोर होना सालुका के सरेंडर करने का कारण माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि कई हथियार भी उसने पुलिस को सौंपे हैं.

