चाईबासा (CHAIBASA): झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में मलेरिया तेजी से फैल रहा है, जिससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है.वर्तमान में सदर अस्पताल में प्रसव करा चुकीं दो महिलाएं और एक सहिया मलेरिया से संक्रमित है. जिनका इलाज चल रहा है.स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने जिले के छह प्रखंडों को 'मलेरिया हॉटस्पॉट' घोषित कर दिया है.
अब तक 74 हजार लोगों की हो चुकी है स्क्रीनिंग
संक्रमण की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने 6 जुलाई से 'मिशन उद्यम' और 'मिशन उद्यम 2.0' के तहत विशेष अभियान शुरू किया है. अभियान के तहत अब तक 74 हजार लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है.जांच में 1,584 लोगों में सामान्य मलेरिया की पुष्टि हुई है, जबकि 1,300 मरीजों में ब्रेन मलेरिया के खतरनाक लक्षण पाए गए है. सिविल सर्जन डॉ. जुझार मांझी ने बताया कि सबसे बड़ी चुनौती यह है कि संक्रमित पाए गए 60 से 70 प्रतिशत मरीजों में मलेरिया के कोई स्पष्ट बाहरी लक्षण नहीं दिखे.
हाई अलर्ट पर पुरा जिला
पड़ोसी जिलों की स्थिति और मानसून के आगमन को देखते हुए उपायुक्त मनीष कुमार के निर्देश पर पूरे जिले को हाई अलर्ट पर रखा गया है. 6 जुलाई से शुरू हुए विशेष अभियान के बाद जांच की रफ्तार बढ़ा दी गई है और अब प्रतिदिन लगभग 10 हजार लोगों की मलेरिया जांच की जा रही है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार मनोहरपुर, टोन्टो, गोइलकेरा, सोनुवा, बंदगांव और बड़ाजामदा प्रखंडों में संक्रमण का सबसे अधिक असर देखा गया है, इसलिए इन्हें मलेरिया हॉटस्पॉट घोषित किया गया है.
प्रशासन रोकथाम के लिए कर रहा है हर प्रयास
मलेरिया की रोकथाम के लिए प्रशासन युद्ध स्तर पर काम कर रहा है. प्रभावित इलाकों में डेल्टामेथ्रिन कीटनाशक का छिड़काव किया जा रहा है. वहीं, मच्छरों के लार्वा को खत्म करने के लिए गांवों के तालाबों और जलस्रोतों में गम्बूजिया मछलियां छोड़ी जा रही है. इसके अलावा उपायुक्त की पहल पर ग्रामीणों के बीच बड़े पैमाने पर मच्छरदानियों का वितरण भी किया गया है.सिविल सर्जन डॉ. जुझार मांझी ने लोगों से अपील की है कि बारिश के मौसम में सतर्क रहें.यदि हल्का बुखार भी आए तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं. साथ ही मच्छरों से बचाव के लिए पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें और रात में मच्छरदानी लगाकर ही सोएं.
रिपोर्ट-संतोष वर्मा

