ACC प्लांट बंदी से गहराया संकट, हजारों परिवारों की रोजी-रोटी पर मंडराया खतरा

ACC प्लांट बंदी से गहराया संकट, हजारों परिवारों की रोजी-रोटी पर मंडराया खतरा

चाईबासा (CHAIBASA): झींकपानी स्थित ACC सीमेंट प्लांट की अस्थायी बंदी अब स्थानीय लोगों के लिए गंभीर आर्थिक संकट का कारण बनती जा रही है. अडाणी समूह के अधिग्रहण के बाद संचालित इस प्लांट के बंद होने से न सिर्फ मजदूरों की आय प्रभावित हुई है, बल्कि आसपास के गांवों और बाजारों की आर्थिक गतिविधियां भी ठप पड़ने लगी हैं. रोजगार और व्यापार पर बढ़ते संकट को देखते हुए स्थानीय लोगों ने "ACC बचाओ संघर्ष समिति" का गठन किया है.

ग्रामीणों और मजदूरों ने झामुमो नेताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ राज्य सरकार तक अपनी चिंता पहुंचाई है. उनका कहना है कि यह फैक्ट्री इलाके की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इसके बंद होने से हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है.

बाजारों में पसरा सन्नाटा

ACC प्लांट के आसपास स्थित जोड़ापोखर, ACC कॉलोनी और अन्य इलाकों में छोटी-बड़ी दुकानों का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है. किराना दुकान, होटल, मेडिकल स्टोर, सैलून, सब्जी विक्रेता, फल दुकानदार, कपड़ा दुकान और ठेला कारोबारियों की आमदनी में भारी गिरावट आई है. कई दुकानदारों का कहना है कि ग्राहकों की संख्या लगातार कम हो रही है और कुछ दुकानें बंद होने की कगार पर पहुंच चुकी हैं.

साप्ताहिक हाट पर भी पड़ा असर
हर शनिवार लगने वाला जोड़ापोखर का प्रसिद्ध साप्ताहिक हाट भी इस संकट से अछूता नहीं रहा है. स्थानीय लोगों की क्रय शक्ति घटने के कारण खरीदारी में भारी कमी आई है. व्यापारी बताते हैं कि पहले जहां बाजार में अच्छी भीड़ होती थी, वहीं अब कारोबार सुस्त पड़ गया है.

फैक्ट्री बंद होने के बाद सबसे बड़ी चिंता मजदूरों के सामने खड़ी हो गई है. जोड़ापोखर, कोंदवा, दोकट्टा, राजंका, नीमडीह, कुदाहातु, सिमजंग और आसपास के कई गांवों के लोग सीधे या परोक्ष रूप से प्लांट पर निर्भर हैं. अधिकांश मजदूर ठेका और अस्थायी श्रेणी में काम करते थे. उनका कहना है कि यदि जल्द उत्पादन शुरू नहीं हुआ तो रोजगार की तलाश में उन्हें दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ेगा.

कंपनी की ओर से अब तक प्लांट की स्थायी बंदी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. प्रबंधन का कहना है कि क्लिंकर डस्ट की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण उत्पादन अस्थायी रूप से रोका गया है. हालांकि करीब एक महीने से कामकाज बंद रहने के कारण लोगों की चिंता लगातार बढ़ रही है.

वर्ष 1936 में स्थापित यह सीमेंट प्लांट क्षेत्र के सबसे पुराने औद्योगिक प्रतिष्ठानों में से एक है. इसके निर्माण के लिए आसपास के गांवों के रैयतों ने अपनी जमीन दी थी. प्लांट के साथ-साथ कॉलोनी, अस्पताल, स्कूल, बैंक, खेल मैदान, चूना पत्थर खदान और रेलवे कनेक्टिविटी जैसी कई सुविधाएं भी इसी भूमि पर विकसित की गई थीं. स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस उद्योग के लिए उन्होंने अपनी जमीन दी, आज उसी के बंद होने से उनका भविष्य अधर में लटक गया है. अब सभी की निगाहें कंपनी प्रबंधन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं.

रिपोर्ट : संतोष वर्मा