रक्षाबंधन पर पेड़ों से जोड़ा रक्षा का रिश्ता, बुन्डू के ग्रामीणों ने लिया जंगल बचाने का संकल्प

चाईबासा के बुन्डू गांव में रक्षाबंधन पर ग्रामीणों ने वन विभाग के साथ पेड़ों को राखी बांधकर जंगल और प्राकृतिक संपदा की सुरक्षा का संकल्प लिया. इस पहल के जरिए पर्यावरण और वन संरक्षण का संदेश दिया गया

रक्षाबंधन पर पेड़ों से जोड़ा रक्षा का रिश्ता, बुन्डू के ग्रामीणों ने लिया जंगल बचाने का संकल्प

चाईबासा (CHIBASA): रक्षाबंधन का पर्व इस बार प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के खास संदेश के साथ मनाया गया. कोल्हान वन प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले बुन्डू गांव में ग्रामीणों ने वन विभाग के साथ मिलकर पेड़ों को राखी बांधी. इस दौरान लोगों ने जंगल को सुरक्षित रखने, पेड़ों की रक्षा करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संपदा को संरक्षित करने का सामूहिक संकल्प लिया.

पेड़ों को भाई मानकर बांधी राखी 

रक्षाबंधन के अवसर पर गांव के महिला और पुरुष जंगल पहुंचे और पेड़ों पर राखी बांधकर उनके साथ रक्षा का प्रतीकात्मक रिश्ता स्थापित किया. ग्रामीणों ने कहा कि जिस तरह रक्षाबंधन का त्योहार सुरक्षा और जिम्मेदारी का संदेश देता है, उसी भावना के साथ जंगल की रक्षा करना भी जरूरी है. कार्यक्रम के माध्यम से पेड़ों की कटाई रोकने और वन क्षेत्र की हरियाली बनाए रखने के प्रति लोगों को जागरूक किया गया.

जीवन और आजीविका से जुड़ा है जंगल 

ग्रामीणों के अनुसार उनके लिए जंगल केवल पेड़-पौधों से भरा क्षेत्र नहीं है, बल्कि दैनिक जीवन और आजीविका का महत्वपूर्ण आधार भी है. वन क्षेत्र से स्थानीय लोगों को कई तरह के उपयोगी प्राकृतिक संसाधन प्राप्त होते हैं. इसके साथ ही जंगल जल, मिट्टी और स्थानीय पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है.ग्रामीणों ने इस बात पर जोर दिया कि वन संपदा की सुरक्षा केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है. जंगल के आसपास रहने वाले लोगों और पूरे समाज को इसमें अपनी भागीदारी निभानी होगी. सामूहिक प्रयास से ही प्राकृतिक संसाधनों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है.

वन संरक्षण के लिए जागरूकता जारी रखन का संकल्प 

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने भविष्य में भी जंगल और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए जागरूकता अभियान जारी रखने की बात कही. उन्होंने वन क्षेत्र को नुकसान से बचाने और अधिक से अधिक लोगों को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने की प्रतिबद्धता जताई.इस अवसर पर राजेश पुरती, रवि पूर्ति, सोनाराम पुरती, जारका अंगारिया, सुखमती पूर्ति, मनीषा पूर्ति और रीना अंगारिया समेत बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष ग्रामीण मौजूद रहे. रक्षाबंधन पर आयोजित इस पहल ने पर्व की परंपरा को वन संरक्षण के संदेश से जोड़ते हुए प्रकृति के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का उदाहरण प्रस्तुत किया.

रिपोर्ट -संतोष वर्मा