सारंडा में रोजगार की मांग पर आंदोलन, रांजाबुरु खदान में अनिश्चितकालीन चक्का जाम

स्थानीय रोजगार और पूर्व के लिखित समझौते को लागू कराने की मांग पर ग्रामीणों ने सेल की गुवा खदान के रांजाबुरु क्षेत्र में अनिश्चितकालीन चक्का जाम शुरू कर दिया. आंदोलन से उत्पादन और लौह अयस्क की ढुलाई प्रभावित हुई है.

सारंडा में रोजगार की मांग पर आंदोलन, रांजाबुरु खदान में अनिश्चितकालीन चक्का जाम

चाईबासा (CHIBASA) : स्थानीय युवाओं को रोजगार देने और पूर्व में हुए लिखित समझौते को लागू करने की मांग को लेकर सारंडा क्षेत्र में ग्रामीणों ने आंदोलन शुरू कर दिया है.सारंडा विकास समिति, जामकुंडिया-दुईया के बैनर तले बड़ी संख्या में ग्रामीण और बेरोजगार युवा सेल की गुवा खदान के रांजाबुरु क्षेत्र पहुंचे और अनिश्चितकालीन आंदोलन सह चक्का जाम शुरू कर दिया.

स्क्रीनिंग मशीन सहित विभिन्न संचालन क्षेत्र जाम

आंदोलन का नेतृत्व मानकी लागुड़ा देवगम और गंगदा पंचायत के मुखिया राजू सांडिल कर रहे हैं. आंदोलनकारी पारंपरिक हथियारों के साथ खदान पहुंचे और स्क्रीनिंग मशीन सहित विभिन्न संचालन क्षेत्रों को जाम कर दिया. इससे खदान में उत्पादन, लौह अयस्क की ढुलाई और डिस्पैच प्रभावित हुआ है.

इससे पहले भी विभिन्न मांगों को लेकर की गई थी बंदी

आंदोलनकारियों का कहना है कि इससे पहले भी रोजगार सहित विभिन्न मांगों को लेकर दो बार आंदोलन और खदान बंदी की गई थी. इसके बाद सेल प्रबंधन, प्रशासन और ग्रामीण प्रतिनिधियों के बीच त्रिपक्षीय वार्ता हुई थी. वार्ता में कई मांगों पर लिखित सहमति बनी थी लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि समझौते को अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया. ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में खदान से प्रभावित 18 गांवों के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देना और 75 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना शामिल है. इसके अलावा रैक लोडिंग और ट्रांसपोर्टिंग के कार्यों में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की भी मांग की जा रही है.

प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग

आंदोलनकारी प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने और कारो नदी की सुरक्षा की मांग भी कर रहे हैं. ग्रामीणों ने ठेका कंपनी मां सरला पर बाहरी लोगों को रोजगार देने का आरोप लगाया है. हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. मुखिया राजू सांडिल ने कहा कि अब केवल आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं होगा. मांगों पर ठोस निर्णय और लिखित समझौते का पालन होने तक उत्पादन और ट्रांसपोर्टिंग बंद रखने की चेतावनी दी गई है. आंदोलन में आसपास के विभिन्न गांवों के मुंडा, ग्रामीण और बेरोजगार युवा शामिल हैं.

रिपोर्ट – संतोष वर्मा