पेपर लीक का Epic Centre रहा बोकारो? ज्यादातर परीक्षाओं का सेटिंग -गेटिंग इसी शहर से, जानिए इनसाइड स्टोरी
झारखंड का बोकारो पेपर लीक करने वाले माफियाओं का क्या एपिक सेंटर बन गया है? आखिर क्यों परीक्षा माफिया बोकारो का चयन करते हैं? सीआईडी की जांच और गिरफ्तारियां से भी इस बात की पुष्टि होती है
TNP DESK झारखंड का बोकारो पेपर लीक करने वाले माफियाओं का क्या एपिक सेंटर बन गया है? आखिर क्यों परीक्षा माफिया बोकारो का चयन करते हैं? सीआईडी की जांच और गिरफ्तारियां से भी इस बात की पुष्टि होती है. बोकारो को प्रश्न पत्र रटवाने और सेटिंग करने के लिए माफिया अपना मुख्य केंद्र बनाए हुए थे. जाँच में सामने आया है कि बड़े पैमाने पर वसूली हुई है.
उल्लेखनीय है दिल्ली के जंतर -मंतर के बाद झारखंड की सबसे अधिक चर्चा है. झारखंड में बड़ा आंदोलन हुआ. सरकार को मांगे माननी पड़ी. हालांकि छात्रों को निराशा भी हुई है. सीआईडी की जांच चल रही है. सीआईडी अपने स्तर से कार्रवाई कर रही है. बोकारो के लोगो की गिरफ्तारियां भी हो रही है. सूचना के मुताबिक अधिकारी बने लोगों को सीआईडी पूछताछ के लिए बुला रही है और मामला संदिग्ध पाए जाने पर उनकी गिरफ्तारी भी हो रही है. इधर, हालिया घटनाक्रम को देखा जाए तो बोकारो कई बड़ी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली का एपिक सेंटर बनकर उभरा है.
सीआईडी की हालिया जांच और गिरफ्तारियां में भी यह बात सामने आई है कि परीक्षा माफियाओं ने बोकारो को प्रश्न पत्र लीक कराने , अभ्यर्थियों को उत्तर रटाने और सेटिंग करने के लिए अपना मुख्य केंद्र बनाया था. सूत्र बता रहे हैं कि यह बात भी सामने आई है कि परीक्षा के ठीक पहले बोकारो को ठिकाना बनाया गया था. परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियो से मिलीभगत कर प्रश्न पत्र लीक कराये गए. इसके बाद 15 से अधिक उम्मीदवारों को बोकारो लाकर एक जगह इकट्ठा किया गया और परीक्षा से पहले ही 65 सवाल और उनके जवाब रटवाए गए.
इसके बदले प्रति उम्मीदवार 12-12 लाख रुपए वसूले गए थे. सूत्र बता रहे हैं कि कोचिंग माफिया बोकारो में एक मजबूत नेटवर्क तैयार किए है. जानकारी के अनुसार जेएसएससी सीजीएल में गड़बड़ी के मामले में सीआईडी की एसआईटी ने अधिकारी बन चुके बोकारो -धनबाद के चार अभ्यर्थियों को अरेस्ट किया था. गिरफ्तार अभ्यर्थियों में धनबाद के कई लोग शामिल हैं. उनमें धनबाद थाना के नावाडीह के दीपक कुमार, दुग्धा बीसीसीएल कॉलोनी के उमेश कुमार राय, धनबाद राजगंज के विजय कुमार तिवारी तथा सुदाम डीह रिवरसाइड निवासी आनंद कुमार सिंह शामिल है.
गिरफ्तारी के पहले सीआईडी ने जानकारी जुटाई थी कि चारों सफल अभ्यर्थी बेवल कंपनी के लिए कथित रूप से काम करने वाले मिथिलेश सिंह के नेटवर्क से जुड़े हुए थे. सूत्रों के अनुसार गलत ढंग से यह लोग परीक्षा पास की थी. साथ ही खुद एजेंट की भूमिका निभाते हुए कई अन्य अभ्यर्थियों का संपर्क भी पेपर लीक करने वाले गिरोह से कराया था. जेपीएससी और जेएसएससी की विभिन्न परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों की जांच कर रही सीआईडी अब गिरफ्तार आरोपियों के इंटर स्टेट कनेक्शन तलाशने में जुटी हुई है .
जांच एजेंसी को संदेह है कि इस मामले में राज्य के अलावा बाहर के भी कुछ बड़े लोग शामिल हैं. यह लोग न केवल झारखंड में होने वाली परीक्षाओं में गड़बड़ी करते थे, बल्कि दूसरे राज्यों में होने वाली परीक्षाओं में भी सफल करने का झांसा देकर राज्य के छात्रों से पैसे की लेनदेन करते थे. एक आंकड़े के मुताबिक 22 जुलाई से अब तक जेपीएससी और जेएसएससी सीजीएल में कई गिरफ्तारियां हुई हैं. जेपीएससी के मामले में 22 जुलाई को अभय तिवारी, श्वेता गुप्ता, रामवीर सिंह, मोहम्मद उस्मान, मोहम्मद एबाद की गिरफ्तारी हुई थी. फिर 24 जुलाई को हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह, संजय कुमार सिंह को अरेस्ट किया गया था.
25 जुलाई को सोनू अरविंद कुमार, 30 जुलाई को सुमन सौरभ अरेस्ट हुए थे. 4 अगस्त को उमेश कुमार, बुद्धेश्वर भगत, रमेश कुमार अरेस्ट किए गए थे. फिर 5 अगस्त को उमाकांत उरांव, रोशन केरकेट्टा, मनोज कुमार, रक्षक सिंह, धर्मेंद्र कुमार गिरफ्तार हुए थे. 10 अगस्त को अध्यक्ष गिरफ्तार किए गए थे. इसी प्रकार जेएसएससी सीजीएल में 18 अगस्त को सुषमा कुमारी, अक्षय तिवारी, फिर 27 अगस्त को सोमांश कुमार, राहुल कुमार, 28 अगस्त को दीपक कुमार, उमेश कुमार राय, विजय कुमार तिवारी, आनंद कुमार सिंह गिरफ्तार हुए थे. 30 अगस्त को समीर कुमार को गिरफ्तार किया गया था.