बोकारो में विस्थापितों का आंदोलन: मंत्री भी पहुंचे लेकिन नतीजा शून्य, जानिए क्यों लगा दी गई निषेधाज्ञा?
कारो स्टील प्लांट में नियोजन की मांग को लेकर विस्थापितों का आंदोलन में अब झारखंड सरकार भी "इंवॉल्व" हो गई है. हालांकि शनिवार को बैठक में कोई नतीजा नहीं निकला.
बोकारो (BOKARO): बोकारो स्टील प्लांट में नियोजन की मांग को लेकर विस्थापितों का आंदोलन में अब झारखंड सरकार भी "इंवॉल्व" हो गई है. हालांकि शनिवार को बैठक में कोई नतीजा नहीं निकला. शनिवार को वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर और झारखंड प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश भी पहुंचे थे. सूत्रों के अनुसार बोकारो सर्किट हाउस में विस्थापितों, बीएसएल प्रबंधन और जिला प्रशासन के बीच वार्ता हुई. हालांकि नियोजन के मुद्दे पर बी एसएल प्रबंधन के इंकार के बाद वार्ता विफल हो गई.
वित्त मंत्री भी शनिवार को बैठे धरना पर
इसके बाद वित्त मंत्री ने सांकेतिक रूप से 2 घंटे के लिए आंदोलन स्थल पर विस्थापितों के साथ लेट गए. इस दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि झारखंड में भाजपा की सरकार नहीं है, इसलिए केंद्र सरकार चाहती है कि यहां के लोग जितने दबाये जा सकें, उतना दबाया जाए. उन्होंने कहा कि जब 1500 लोगों को अप्रेंटिस कराया गया है, तो रोजगार देने की गारंटी भी देनी होगी. इस बीच पता चला है कि रविवार को बोकारो इस्पात संयंत्र के सभी प्रवेश एवं निकास द्वारा को बंद कर विस्थापित अप्रेंटिस संघ द्वारा किए जा रहे धरना प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है.
मुख्य द्वार के 200 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है
बोकारो स्टील प्लांट के मुख्य द्वार के 200 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है. यह आदेश 18 अक्टूबर से अगले आदेश तक प्रभाव में होगा. प्रशासन के अनुसार संयंत्र के सभी मार्गों को बंद किए जाने से कर्मियों अधिकारियों, संविदा श्रमिकों और आवश्यक सेवाओं के आवागमन में बाधा उत्पन्न हो रही है. इससे औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं और विधि व्यवस्था की समस्या पैदा हो गई है. औद्योगिक शांति बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया हैं. निषेधाज्ञा लगने के बाद मुख्य द्वार के 200 मीटर के दायरे में पांच या इससे अधिक व्यक्तियों को एक साथ एकत्र होने, घूमने या भीड़ लगाने पर प्रतिबंध रहेगा.