मुंबई में गोमिया प्रवासी मजदूर हीरालाल नायक की मौत, दो मासूम बेटियों से छिना पिता का साया

मुंबई में मजदूरी करने गए बोकारो के गोमिया निवासी हीरालाल नायक की इलाज के दौरान मौत हो गई। वह पत्नी और दो मासूम बेटियों को पीछे छोड़ गए हैं। परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच और सरकारी सहायता की मांग की है।

मुंबई में गोमिया प्रवासी मजदूर हीरालाल नायक की मौत, दो मासूम बेटियों से छिना पिता का साया

बोकारो(BOKARO): बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड अंतर्गत चतरोचट्टी गांव के रहने वाले प्रवासी मजदूर हीरालाल नायक की मुंबई में इलाज के दौरान मौत हो गई. परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर करने और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद लेकर मुंबई गए हीरालाल एक होटल में मजदूरी करते थे. शुक्रवार को मुंबई के जेजे अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली. घटना की सूचना गांव पहुंचते ही परिवार और स्थानीय लोगों में शोक की लहर दौड़ गई.

13 दिनों तक अस्पताल में चला इलाज

परिजनों के मुताबिक, हीरालाल नायक का होटल मालिक के साथ पैसों को लेकर विवाद हुआ था. इसके बाद वह घायल अवस्था में रेलवे पुलिस को मिले. उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें मुंबई के जेजे अस्पताल में भर्ती कराया गया. करीब 13 दिनों तक चिकित्सकों की निगरानी में इलाज चलने के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी. हालांकि, विवाद और हीरालाल के घायल होने की परिस्थितियों को लेकर परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. परिजन पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं.

दो छोटी बेटियों और पत्नी के सामने संकट

हीरालाल अपने पीछे पत्नी अनीता देवी और दो मासूम बेटियों को छोड़ गए हैं. बड़ी बेटी अंशिका की उम्र करीब साढ़े तीन वर्ष है, जबकि छोटी बेटी कीर्तिका लगभग डेढ़ वर्ष की है. परिवार की आजीविका का प्रमुख सहारा रहे हीरालाल की अचानक मौत से परिजनों के सामने आर्थिक संकट भी उत्पन्न हो गया है. प्रवासी मजदूरों के हित में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली ने पीड़ित परिवार से संपर्क कर सहयोग का भरोसा दिया है. मुंबई से हीरालाल का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव चतरोचट्टी लाने की प्रक्रिया में भी सहायता की जा रही है.

परिवार ने सरकार से लगाई मदद की गुहार

शोकाकुल परिजनों ने सरकार और संबंधित प्रशासन से आर्थिक सहायता एवं आवश्यक कानूनी सहयोग की मांग की है. परिवार चाहता है कि हीरालाल के घायल होने से लेकर उनकी मौत तक की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच हो और यदि जांच में किसी की लापरवाही या दोष सामने आता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए. हीरालाल की मौत ने एक बार फिर दूसरे राज्यों में रोजगार के लिए जाने वाले प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा, आपातकालीन सहायता और उनके परिवारों के सामाजिक-आर्थिक संरक्षण से जुड़े सवालों को सामने ला दिया है.

रिपोर्ट – संजय कुमार