Bokaro: पुष्पा महतो हत्याकांड में बड़ा मोड़, आरोपी के बयान के बाद थाना प्रभारी और मुंशी पर कार्रवाई, 26 पुलिसकर्मियों को राहत

Bokaro: पुष्पा महतो हत्याकांड में बड़ा मोड़, आरोपी के बयान के बाद थाना प्रभारी और मुंशी पर कार्रवाई, 26 पुलिसकर्मियों को राहत

बोकारो(BOKARO): जिले के पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र की चर्चित पुष्पा महतो हत्याकांड की जांच में बड़ा मोड़ आया है. पुलिस हिरासत में मुख्य आरोपी दिनेश कुमार महतो का वीडियोग्राफी के जरिए दर्ज किया गया कथित बयान अब जांच का अहम हिस्सा बन गया है. जांच एजेंसियों का मानना है कि यह बयान न केवल हत्या की गुत्थी सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, बल्कि मामले की शुरुआती जांच में कथित लापरवाही और अनियमितताओं की भी पड़ताल करेगा.

जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि वर्ष 2018 बैच के तत्कालीन पिंड्राजोरा थाना प्रभारी अभिषेक रंजन और तत्कालीन मुंशी की भूमिका संदेह के घेरे में है. आरोप है कि मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया और शुरुआती स्तर पर जांच को प्रभावित करने की कोशिश की गई. इसी आधार पर दोनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी गई है.

इस मामले में पहले पिंड्राजोरा थाना के 28 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया था. हालांकि, बोकारो के पूर्व सिटी डीएसपी आलोक रंजन की जांच रिपोर्ट के बाद 26 पुलिसकर्मियों को निर्दोष पाते हुए उनका निलंबन समाप्त कर दिया गया. जांच में उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले. वहीं, तत्कालीन थाना प्रभारी और मुंशी के खिलाफ विभागीय जांच जारी है.

जांच के दौरान यह आरोप भी सामने आया कि मुख्य आरोपी दिनेश कुमार महतो से कथित तौर पर नकद राशि और शराब लेकर जांच को प्रभावित किया गया. इस संबंध में पूछताछ के बाद तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए कार्रवाई की थी. अब जांच का फोकस कथित भ्रष्टाचार और जांच में हुई लापरवाही पर भी है.

यह मामला जुलाई 2025 में सामने आया था, जब पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र के खुंटाडीह गांव की रहने वाली चास कॉलेज की छात्रा पुष्पा महतो 21 जुलाई को कॉलेज में फॉर्म जमा करने के लिए घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी. परिजनों का आरोप है कि शुरुआती दिनों में पुलिस ने उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया. बाद में एफआईआर दर्ज हुई, लेकिन जांच की रफ्तार धीमी रही.

पीड़ित परिवार ने अंततः झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. फरवरी 2026 में सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की. इसके बाद डीजीपी के निर्देश पर डीआईजी संध्या रानी मेहता की निगरानी में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया.

एसआईटी की पूछताछ में आरोपी दिनेश कुमार महतो ने स्वीकार किया कि उसका पुष्पा के साथ पिछले तीन वर्षों से प्रेम संबंध था. पूछताछ में उसने बताया कि शादी के दबाव से बचने के लिए उसने 21 जुलाई 2025 को पुष्पा को चास कॉलेज के पास बुलाया और बहाने से सुनसान स्थान पर ले जाकर उसकी हत्या कर दी. आरोपी की निशानदेही पर कई महीने बाद जंगल से पुष्पा का कंकाल और हत्या में प्रयुक्त चाकू बरामद किया गया.

अब आरोपी के वीडियो बयान, बरामद साक्ष्यों और विभागीय जांच के आधार पर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है. पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि लंबे इंतजार के बाद उन्हें न्याय मिलेगा और इस मामले में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर भी उचित कार्रवाई होगी.