त्योहारों की खुशियों पर महंगाई की मार, सफर से खरीदारी तक बढ़ा खर्च और बिगड़ा बजट
त्योहारों की खुशियों के बीच बढ़ती महंगाई ने लोगों का बजट बिगाड़ दिया है. चीनी, तेल, फल, ड्राई फ्रूट्स और पूजा सामग्री से लेकर सफर और ऑनलाइन खरीदारी तक का खर्च बढ़ा है.
त्योहारों की खुशियों के बीच बढ़ती महंगाई ने लोगों का बजट बिगाड़ दिया है. चीनी, तेल, फल, ड्राई फ्रूट्स और पूजा सामग्री से लेकर सफर और ऑनलाइन खरीदारी तक का खर्च बढ़ा है.
टीनपी डेस्क (TNP DESK): त्योहारों का मौसम आते ही घरों में खुशियां और बाजारों में रौनक बढ़ जाती है. सावन का महीना अब खत्म होने की ओर है, लेकिन इसके साथ ही हिंदू त्योहारों का सिलसिला शुरू हो जाता है. रक्षाबंधन हो या तीज, ये त्योहार परिवार को एक साथ लाने और अपनों से मिलने-जुलने का खास मौका देते हैं. हालांकि, इस बार त्योहारों की इन खुशियों के बीच बढ़ती महंगाई लोगों की चिंता भी बढ़ा रही है. सिर्फ मिठाई, फल, तेल और ड्राई फ्रूट्स ही महंगे नहीं हुए हैं, बल्कि एक जगह से दूसरी जगह जाने और ऑनलाइन खरीदारी तक का खर्च बढ़ने का असर भी लोगों की जेब पर पड़ रहा है. आधिकारिक सर्विस पीपीआई के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में हवाई यात्रा करीब 32 फीसदी महंगी हुई, जबकि रेल यात्री किराए में 3.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. यानी त्योहार पर घर जाने या रिश्तेदारों से मिलने की योजना बनाने वालों को सफर के लिए भी ज्यादा बजट रखना पड़ सकता है. ऐसे में कई लोगों के लिए बाहर घूमने या बार-बार यात्रा करने के बजाय घर पर रहना और खर्च संभालना ज्यादा बेहतर विकल्प बनता नजर आ रहा है.

चीनी और तेल की बढ़ती कीमतों ने बिगाड़ा रसोई का बजट
त्योहारों में मिठाई और पकवान बनाने के लिए चीनी और तेल की जरूरत सबसे ज्यादा होती है. इस बार चीनी की कीमत करीब 44 रुपये किलो से बढ़कर 70 रुपये तक पहुंच गई है. गुड़ भी करीब 45 रुपये से बढ़कर 70 रुपये किलो हो गया है. वहीं सनफ्लावर ऑयल करीब 148 रुपये से बढ़कर 164.19 रुपये किलो और पाम ऑयल 130 रुपये से बढ़कर करीब 148 रुपये किलो हो गया है. सरसों तेल की कीमत भी करीब 183 रुपये से बढ़कर 196.44 रुपये किलो तक पहुंच गई है. इन बढ़ी कीमतों का असर घर में बनने वाले पकवानों के साथ बाजार की मिठाइयों पर भी पड़ सकता है. चीनी की बढ़ती कीमत का असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला है. शुल्क-मुक्त कच्ची चीनी के आयात की मंजूरी और चीनी के स्टॉक पर सख्ती के बाद कई शुगर कंपनियों के शेयरों में तेजी आई. विश्वराज शुगर इंडस्ट्रीज के शेयर करीब 19.7 फीसदी तक चढ़े, जबकि बजाज हिंदुस्तान शुगर और द्वारिकेश शुगर में भी उछाल देखा गया.
फल और ड्राई फ्रूट्स भी जेब पर भारी
त्योहारों में पूजा और मेहमानों के स्वागत के लिए फलों की खरीदारी बढ़ जाती है. लेकिन इस बार फलों के दाम भी लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं. सेब 100-120 रुपये किलो से बढ़कर 180-200 रुपये किलो तक पहुंच गया है. केला करीब 60 रुपये दर्जन से बढ़कर 70 रुपये, अनार 160 से 180 रुपये और संतरा 60 से 80 रुपये किलो तक पहुंच गया है. मौसमी की कीमत भी करीब 100 से बढ़कर 120 रुपये किलो हो गई है. दूसरी तरफ काजू 850-1000 रुपये किलो और बादाम 700-900 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं. पूजा सामग्री, फूल और मालाओं के दाम बढ़ने से त्योहार की तैयारी का कुल खर्च और बढ़ रहा है. यानी परिवार को मिठाई से लेकर पूजा और मेहमानों की खातिरदारी तक हर जगह अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है.

ऑनलाइन खरीदारी पर भी बढ़ सकता है असर
त्योहारों से पहले ऑनलाइन खरीदारी भी बढ़ जाती है, लेकिन इस बार ई-कॉमर्स कंपनियों की ओर से विक्रेताओं पर बढ़ाए गए जुर्माने का असर ग्राहकों की जेब तक पहुंचने की आशंका है. अमेजन पर महंगे ऑर्डर रद्द होने या तय समय पर शिप न करने पर विक्रेता पर 1,600 रुपये तक जुर्माना लग सकता है. उदाहरण के लिए 5,000 रुपये के ऑर्डर पर 10 फीसदी यानी 500 रुपये और 20,000 रुपये के ऑर्डर पर 8 फीसदी यानी 1,600 रुपये तक शुल्क लग सकता है. फ्लिपकार्ट ने भी पुराने विक्रेताओं के लिए डिलीवरी में चूक पर प्रति ऑर्डर 30 से 90 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया है. विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर विक्रेताओं की लागत बढ़ती है तो उसका कुछ हिस्सा उत्पादों की कीमतों के जरिए ग्राहकों तक पहुंच सकता है.
सफर महंगा, निवेश की कुछ सेवाएं सस्ती
महंगाई का असर सिर्फ त्योहारों की खरीदारी पर नहीं, बल्कि सेवाओं की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है. सर्विस पीपीआई के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, हवाई यात्रा सबसे तेजी से महंगी हुई है. वहीं रेल यात्री किराया 3.5 फीसदी बढ़ा, जबकि माल ढुलाई की दर सिर्फ 0.10 फीसदी बढ़ी. दूसरी ओर बैंकिंग और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन जैसी सेवाओं की कीमत में 3.35 फीसदी तक गिरावट आई है. जून तक छह महीनों में बैंकिंग सर्विस करीब 7.45 फीसदी सस्ती हुई है. हालांकि इंश्योरेंस और टेलीकॉम जैसी सेवाओं की कीमत करीब 1 फीसदी बढ़ी है. यानी एक तरफ रोजमर्रा के खर्च और यात्रा महंगी हो रही है, तो कुछ वित्तीय सेवाओं में राहत भी देखने को मिल रही है.

त्योहार मनाएं, लेकिन बजट देखकर
त्योहार खुशी और अपनों के साथ समय बिताने का मौका होते हैं, लेकिन बढ़ती कीमतों के बीच परिवारों के लिए बजट संभालना चुनौती बन गया है. महंगे सफर, बढ़ती खाद्य कीमतें, ड्राई फ्रूट्स, पूजा सामग्री और ऑनलाइन खरीदारी का बढ़ता खर्च लोगों को सोच-समझकर पैसा खर्च करने के लिए मजबूर कर रहा है. ऐसे में त्योहार की खरीदारी से पहले जरूरी सामान की सूची बनाना, कीमतों की तुलना करना और गैर-जरूरी खर्च से बचना बेहतर होगा. खुशियां मनाना जरूरी है, लेकिन इस बार समझदारी से खर्च करना भी उतना ही जरूरी है, ताकि त्योहार खत्म होने के बाद बढ़े हुए खर्च का बोझ परिवार के बजट पर भारी न पड़े.