धनबाद (DHANBAD): तृणमूल कांग्रेस की राजनीति फिलहाल दिल्ली शिफ्ट हो गई है. तरह-तरह की चर्चाएं चल रही है. यह भी चर्चा है कि तृणमूल से टूटने वाले भी सांसदों के गुट में फुट हो गई है. आपको बता दें कि तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने अभी हाल ही में कहा था कि बंगाल की राजनीति में कुछ बड़ा होने वाला है. फिर तो इसके पक्ष और विपक्ष में कई तरह की चर्चाएं चलने लगीं. सूत्र बता रहे हैं कि तृणमूल कांग्रेस से बगावत करने वाले 20 सांसदों में से 3 सांसद दिल्ली में थे लेकिन वह एनडीए की बैठक में शामिल नहीं हुए. क्यों नहीं हुए, इसकी कोई अधिकृत जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई.
इसके बाद चर्चा तेज हुई कि तीनों सांसद तृणमूल कांग्रेस में लौट सकते है. यह जो तीन सांसद हैं, उनके नाम अबू ताहेर, खलीलुर रहमान,युनुस पठान बताए गए है. राजनीतिक पंडित मानते हैं कि यह लोग वापस ममता बनर्जी के पास जा सकते है. यह भी चर्चा है कि NCPI का बीजेपी में विलय हो सकता हैं. संभवतः इस वजह से अपने-अपने क्षेत्र के राजनीतिक समीकरण को देखते हुए तीनों सांसद भाजपा से सीधे जुड़ने से परहेज कर रहे हों. सांसद सौगत राय ने कहा है कि टीएमसी छोड़ने वाले कई सांसद लगातार पार्टी के संपर्क में हैं. जल्द ही बंगाल की राजनीतिक समीकरण बदल सकती है. उन्होंने कहा कि शुरुआती में पार्टी के प्रति नाराजगी थी, जिसके कारण उन लोगों ने तृणमूल छोड़ा. अब जिस तरह का डेवलपमेंट हो रहा है, यह बात कई सांसदों को पसंद नहीं आ रही है.
इस मामले में एक बड़ा पेंच है कि ममता बनर्जी ने बागी सांसदों की सदस्यता रद्द करने के लिए मुकदमा दायर की है. संकेत मिल रहे हैं कि यदि बागी सांसद लौटते हैं, तो याचिका को वापस लेने पर विचार किया जा सकता है. दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के सांसद और ममता बनर्जी के करीबी सौगत राय ने दावा किया है कि पार्टी के कई बागी सांसद, जो एनडीए से जुड़ गए हैं ,वह अब परेशानी महसूस कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सत्ताधारी पार्टी के साथ बने रहने के लिए उन पर तरह-तरह के दबाव बनाए जा रहे हैं. बावजूद अच्छे परिणाम आने वाले है. बता दे कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद 20 सांसदों ने पार्टी छोड़ दी थी और घोषणा की थी कि वह नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई ) में शामिल हो रहे है.

