आखिर विश्वकर्मा को क्यों कहा जाता है औजारों का देवता? जानिए क्या है मान्यता
भगवान विश्वकर्मा को औजारों का देवता क्यों कहा जाता है? जानिए सोने की लंका, द्वारका, इंद्रपुरी और पुष्पक विमान से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं.
भगवान विश्वकर्मा को औजारों का देवता क्यों कहा जाता है? जानिए सोने की लंका, द्वारका, इंद्रपुरी और पुष्पक विमान से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं.
टीएनपी डेस्क (TNP DESK): भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का पहला वास्तुकार, इंजीनियर और औजारों का देवता माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उन्होंने देवताओं के लिए महल, नगर, विमान, अस्त्र-शस्त्र और कई दिव्य वस्तुओं का निर्माण किया था. कहा जाता है कि निर्माण और शिल्पकला में इस्तेमाल होने वाले औजार भी उन्हीं की देन हैं. यही कारण है कि विश्वकर्मा पूजा पर कारीगर, इंजीनियर, मजदूर और तकनीकी कार्यों से जुड़े लोग मशीनों तथा औजारों की पूजा करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि देवशिल्पी विश्वकर्मा ने किन अद्भुत नगरियों और विमानों को बनाया था? आइए जानते हैं उनकी दिव्य रचनाओं से जुड़ी मान्यताएं.
सोने की लंका का किया था निर्माण
धार्मिक कथाओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा ने भगवान शिव और माता पार्वती के लिए सोने की लंका का निर्माण किया था. इस नगरी की दीवारों, महलों और भवनों को स्वर्ण से तैयार किया गया था. इसकी सुंदरता और भव्यता इतनी अद्भुत थी कि इसे उस समय की सबसे वैभवशाली नगरी माना गया. मान्यता है कि गृह प्रवेश के समय रावण के पिता ऋषि विश्रवा को पूजा कराने के लिए बुलाया गया था. पूजा संपन्न होने के बाद उन्होंने दक्षिणा के रूप में सोने की लंका मांग ली थी. बाद में रावण इस नगरी का राजा बना. रामायण में भी लंका की भव्यता का विस्तार से वर्णन मिलता है.

समुद्र के बीच बसाई द्वारका नगरी
भगवान श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी को भी विश्वकर्मा की महान रचनाओं में शामिल किया जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार मथुरा पर लगातार होने वाले हमलों से वहां के लोगों को सुरक्षित रखने के लिए श्रीकृष्ण ने एक सुरक्षित नगर बनाने का निर्णय लिया था. इसके बाद विश्वकर्मा ने समुद्र के बीच करीब 12 योजन क्षेत्र में द्वारकापुरी का निर्माण किया. कहा जाता है कि यह भव्य नगरी एक ही रात में तैयार कर दी गई थी. इसमें सुंदर महल, चौड़ी सड़कें, उद्यान और सुरक्षा की विशेष व्यवस्थाएं मौजूद थीं. वास्तुकला और नगर नियोजन की दृष्टि से द्वारका को अद्भुत माना गया है.
देवलोक में बनाई भव्य इंद्रपुरी
स्वर्गलोक के राजा इंद्र की राजधानी इंद्रपुरी का निर्माण भी भगवान विश्वकर्मा ने किया था. मान्यताओं के अनुसार इस दिव्य नगरी में विशाल महल, सुंदर उद्यान और आकर्षक मार्ग बनाए गए थे. इसकी भव्यता देखकर देवता और ऋषि-मुनि भी आश्चर्यचकित हो जाते थे. इंद्रपुरी में सुविधाओं के साथ सुंदरता और सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया था. इस अलौकिक नगरी की रचना ने विश्वकर्मा को देवताओं के सबसे कुशल वास्तुकार के रूप में स्थापित किया.

मन की गति से चलता था पुष्पक विमान
पुष्पक विमान भगवान विश्वकर्मा की सबसे रहस्यमयी रचनाओं में से एक माना जाता है. कथाओं के अनुसार इस विमान का निर्माण ब्रह्मा के लिए किया गया था, जिसे बाद में धन के देवता कुबेर को सौंप दिया गया. आगे चलकर रावण ने इसे कुबेर से छीन लिया था. मान्यता है कि पुष्पक विमान चालक की इच्छा के अनुसार उड़ता और अपना आकार बदल सकता था. रामायण में भगवान राम के लंका विजय के बाद इसी विमान से अयोध्या लौटने का उल्लेख मिलता है.
क्यों कहलाते हैं देवशिल्पी?
सोने की लंका, द्वारका, इंद्रपुरी और पुष्पक विमान जैसी रचनाएं भगवान विश्वकर्मा की अद्भुत शिल्पकला का प्रमाण मानी जाती हैं. इसी कारण उन्हें देवशिल्पी और सृष्टि का पहला इंजीनियर कहा जाता है. विश्वकर्मा पूजा के दिन लोग उनसे अपने कार्य में सफलता, सुरक्षित मशीनरी और उन्नति का आशीर्वाद मांगते हैं.