TNP DESK: 20 दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठे शिक्षा सुधार और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया. पुलिस का कहना है कि यह कदम दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश और डॉक्टरों की सलाह पर उठाया गया, जबकि आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि उन्हें जबरन अस्पताल ले जाया गया.
लेकिन इस घटना ने एक बार फिर पूरे देश में बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. आखिर ऐसा क्या है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर किसी व्यक्ति को 20 दिन तक भूख हड़ताल करनी पड़े? लाखों छात्र सड़कों पर उतरते हैं, प्रदर्शन करते हैं और कई जगह पुलिस से उनकी झड़प भी होती है, लेकिन पेपर लीक की घटनाएं फिर भी थमने का नाम नहीं लेतीं.
NEET क्यों बना सबसे बड़ा विवाद?
पिछले कुछ वर्षों में मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET सबसे ज्यादा विवादों में रही है. हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर इस परीक्षा में शामिल होते हैं. लेकिन पेपर लीक, फर्जी अभ्यर्थियों, सॉल्वर गैंग और अन्य अनियमितताओं की खबरें सामने आने के बाद सबसे बड़ा नुकसान उन छात्रों का होता है, जिन्होंने पूरी मेहनत और ईमानदारी से तैयारी की होती है.
NEET की शुरुआत वर्ष 2013 में हुई थी. शुरुआती दौर में कानूनी विवादों के कारण परीक्षा प्रणाली में कई बदलाव हुए. बाद में यह देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा बन गई. हालांकि समय-समय पर अलग-अलग राज्यों से पेपर लीक और नकल गिरोह के मामले सामने आते रहे. वर्ष 2024 में पेपर लीक और ग्रेस मार्क्स विवाद के बाद देशभर में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए. जांच एजेंसियों ने कई राज्यों में कार्रवाई की और कई लोगों को गिरफ्तार भी किया, लेकिन परीक्षा प्रणाली पर उठे सवाल पूरी तरह खत्म नहीं हुए.
सिर्फ NEET नहीं, कई भर्ती परीक्षाएं भी रहीं विवादों में
पेपर लीक का मामला केवल NEET तक सीमित नहीं है. पिछले कुछ वर्षों में पुलिस भर्ती, शिक्षक भर्ती, पटवारी, क्लर्क भर्ती, राज्य लोक सेवा आयोग और कई अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप लगे. कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं, दोबारा आयोजित करनी पड़ीं और लाखों अभ्यर्थियों को लंबे समय तक परिणाम का इंतजार करना पड़ा.
आखिर पेपर लीक कैसे हो जाता है?
विशेषज्ञों के अनुसार पेपर लीक के पीछे कई वजहें हो सकती हैं. प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उसकी छपाई, पैकिंग, परिवहन और परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने की प्रक्रिया में कई लोग शामिल होते हैं. यदि किसी भी स्तर पर सुरक्षा में चूक हो जाए या कोई कर्मचारी भ्रष्टाचार में शामिल हो जाए, तो गोपनीय जानकारी बाहर पहुंच सकती है. कई मामलों में जांच एजेंसियों ने संगठित गिरोह, दलालों, कुछ अधिकारियों और सॉल्वर गैंग की भूमिका का भी खुलासा किया है.
UPSC में पेपर लीक के मामले क्यों नहीं आते?
लोग अक्सर सवाल उठाते हैं कि यदि NEET जैसी परीक्षा में पेपर लीक हो सकता है तो UPSC में ऐसा क्यों नहीं होता? विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे बड़ा कारण UPSC की बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था है. प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर वितरण तक पूरी प्रक्रिया बेहद गोपनीय होती है. हर स्तर पर सीमित लोगों की पहुंच होती है और कड़ी निगरानी रखी जाती है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि वहां गलती असंभव है, लेकिन अब तक बड़े स्तर पर पेपर लीक जैसा मामला सामने नहीं आया है.
क्या सरकार पेपर लीक कराती है?
सोशल मीडिया पर कई बार यह आरोप लगाया जाता है कि सरकार खुद पेपर लीक करवाती है. हालांकि अब तक ऐसी कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट, अदालत का फैसला या ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि केंद्र या कोई राज्य सरकार जानबूझकर पेपर लीक कराती है. इसलिए ऐसा दावा करना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं माना जा सकता. हालांकि परीक्षा की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी जरूर है. जब बार-बार ऐसी घटनाएं होती हैं, तो लोगों का भरोसा कमजोर पड़ता है और जवाबदेही की मांग तेज हो जाती है.
विरोध प्रदर्शन और बढ़ता आक्रोश
पेपर लीक के मामलों को लेकर छात्र संगठन और CJP लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. कुछ जगह प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, जबकि कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की घटनाएं भी सामने आईं. पुलिस का कहना है कि कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की जाती है, जबकि प्रदर्शनकारी इसे अपनी आवाज दबाने की कोशिश बताते हैं. हर मामले के तथ्य अलग होते हैं और उनकी जांच भी अलग-अलग होती है.
सोनम वांगचुक के आंदोलन ने फिर छेड़ी बहस
सोनम वांगचुक का आंदोलन अब केवल उनकी व्यक्तिगत मांग नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार की बहस का प्रतीक बन गया है. उनका कहना है कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए. वहीं सरकार का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं.
अब आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पेपर लीक होने के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है. जरूरत ऐसी व्यवस्था बनाने की है, जहां प्रश्नपत्र लीक होने की संभावना ही खत्म हो जाए. इसके लिए डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करना, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना, दोषियों को त्वरित सजा दिलाना और छात्रों का भरोसा दोबारा कायम करना सबसे जरूरी कदम हैं. क्योंकि किसी भी देश का भविष्य उसकी शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर करता है, और जब उसी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगें, तो उसका असर पूरे समाज पर पड़ता है.

