टीनपी डेस्क (TNP DESK): मिडिल ईस्ट में चल रहे है तनाव को लेकर भारत में असर देखने को मिल रहा है. कभी गैस सिलेंडर को लेकर तो कभी पेट्रोल-डीजल को लेकर. इसी को लेकर भारत में इन दिनों फिर से पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले E20 पेट्रोल को लेकर खूब चर्चा हो रही है. सोशल मीडिया पर इसे लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं. किसी का कहना है कि इससे इंजन खराब हो जाएगा, तो कोई इसे माइलेज कम होने की वजह बता रहा है. कई लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि आखिर पेट्रोल पंपों पर सिर्फ E20 पेट्रोल ही क्यों बेचा जा रहा है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि E20 क्या है, इसे क्यों लागू किया गया और क्या वास्तव में इससे वाहन को कोई नुकसान होता है.

क्या है E20 पेट्रोल?
E20 का मतलब है ऐसा पेट्रोल जिसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल (Ethanol) और 80 प्रतिशत सामान्य पेट्रोल मिलाया जाता है. एथेनॉल एक बायोफ्यूल है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है. इसका उद्देश्य पेट्रोल की खपत कम करना और पर्यावरण को होने वाले प्रदूषण में कमी लाना है.
भारत सरकार ने एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के तहत पूरे देश में अप्रैल 2025 से E20 पेट्रोल की बिक्री शुरू कर दी. पहले इसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक रखा गया था, लेकिन इसे तय समय से पहले ही पूरा कर लिया गया.
E20 को लेकर विवाद क्यों हो रहा है?
E20 लागू होने के बाद कई वाहन मालिकों ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि इससे इंजन पर असर पड़ सकता है. कुछ लोगों का कहना है कि पुराने वाहनों में E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से फ्यूल पाइप, इंजन के पार्ट्स और माइलेज प्रभावित हो सकते हैं.
हालांकि, सरकार और वाहन निर्माता कंपनियों का कहना है कि नए मॉडल के अधिकांश वाहन E20 के अनुरूप तैयार किए जा रहे हैं. जिन वाहनों को E20 के लिए डिजाइन किया गया है, उनमें किसी तरह की तकनीकी समस्या नहीं आती. पुराने वाहनों के लिए कंपनी की सलाह के अनुसार ईंधन का उपयोग करना बेहतर माना जाता है.

पेट्रोल पंपों पर सिर्फ E20 ही क्यों मिल रहा है?
देशभर में पेट्रोल पंपों पर E20 पेट्रोल की आपूर्ति इसलिए की जा रही है क्योंकि सरकार एथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा देना चाहती है. इससे भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी. साथ ही विदेशी मुद्रा की बचत होगी और किसानों को भी एथेनॉल उत्पादन के जरिए अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा.
सरकार का मानना है कि जैव ईंधन (Biofuel) के इस्तेमाल से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा.

अब E30 की तैयारी भी शुरू
E20 के लक्ष्य को हासिल करने के बाद सरकार अब अगले चरण की तैयारी में जुट गई है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने E22, E25, E27 और E30 जैसे नए एथेनॉल मिश्रित ईंधन विकल्पों को अधिसूचित कर दिया है. यानी भविष्य में पेट्रोल में 30 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाया जा सकता है.
हालांकि, इन ईंधनों को बड़े स्तर पर लागू करने से पहले वाहन कंपनियों को अपने इंजन और फ्यूल सिस्टम में जरूरी बदलाव करने होंगे ताकि वाहन सुरक्षित तरीके से इन ईंधनों पर चल सकें.

क्या कहती है सरकार?
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय का कहना है कि E20 से अधिक एथेनॉल मिश्रण को लेकर जो आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं, उन्हें साबित करने वाला कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण फिलहाल उपलब्ध नहीं है. सरकार का दावा है कि चरणबद्ध तरीके से परीक्षण और तकनीकी मानकों के आधार पर ही नए ईंधन लागू किए जाएंगे.
वाहन मालिकों को क्या करना चाहिए?
यदि आपके पास नया वाहन है और कंपनी ने उसे E20-रेडी बताया है, तो E20 पेट्रोल का उपयोग सुरक्षित माना जाता है. वहीं पुराने वाहन मालिकों को अपनी वाहन निर्माता कंपनी की गाइडलाइन का पालन करना चाहिए. किसी भी वायरल सोशल मीडिया पोस्ट पर भरोसा करने के बजाय अधिकृत जानकारी पर विश्वास करना बेहतर होगा.

