पश्चिम बंगाल: ग्रामीणों ने पेश की मिसाल! भारत-बांग्लादेश सीमा सुरक्षा के लिए दान की अपनी जमीन

पश्चिम बंगाल: ग्रामीणों ने पेश की मिसाल! भारत-बांग्लादेश सीमा सुरक्षा के लिए दान की अपनी जमीन

TNP DESK: भारत-बांग्लादेश सीमा से लगे पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले में कुछ ग्रामीणों ने देश की सुरक्षा के लिए एक अनोखी मिसाल पेश की है. सतग्राम मानाबाड़ी इलाके के तीन ग्रामीणों ने सीमा पर फेंसिंग कराने के लिए अपनी जमीन मर्जी से प्रशासन को दे दी. उनका मानना है कि सीमा पर मजबूत तारबंदी होने से गांव में सुरक्षा बढ़ेगी और घुसपैठ, चोरी और तस्करी जैसी समस्याओं पर रोक लगेगी.

ग्रामीणों का कहना है कि कई वर्षों से बिना फेंसिंग वाली सीमा के कारण गांव के लोग डर और असुरक्षा के माहौल में जी रहे थे.रात के अंधेरे में सीमा पार से लोगों की आवाजाही होती थी, मवेशियों की चोरी की घटनाएं सामने आती थीं और किसानों की फसलों को भी नुकसान पहुंचता था. इसी परेशानी को देखते हुए गांव के लोगों ने खुद आगे आकर जमीन देने का फैसला लिया.

जमीन देने वालों में शामिल बिकाश राय ने बताया कि उन्होंने करीब 20 डिसमिल जमीन देशहित में दी है. उनका कहना है कि गांव के लोग लंबे समय से असुरक्षित महसूस कर रहे थे और अब फेंसिंग बनने के बाद लोगों को राहत मिलेगी, उन्होंने कहा कि यह सिर्फ गांव की सुरक्षा नहीं, बल्कि पूरे देश की सुरक्षा का मामला हैं.

भारत-बांग्लादेश सीमा पर लंबे समय से फेंसिंग का काम अधूरा पड़ा था, लेकिन अब इस दिशा में तेजी लाई जा रही है. सरकार ने सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ को जमीन सौंपने की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी है. इसी कड़ी में 28 मई को राज्य सरकार ने 142.79 एकड़ जमीन बीएसएफ को हस्तांतरित की. प्रशासन का लक्ष्य अगले 45 दिनों में लगभग 600 एकड़ जमीन सीमा सुरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए उपलब्ध कराना है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमा से जुड़े इलाकों में सबसे बड़ी समस्या तस्करी और अवैध आवाजाही रही है. ग्रामीणों का मानना है कि फेंसिंग पूरी होने के बाद किसानों और सीमा के पास रहने वाले परिवारों को काफी राहत मिलेगी.हालांकि, जमीन देने वाले परिवारों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। ग्रामीणों के अनुसार सर्वे का काम पूरा हो चुका है और प्रशासनिक प्रक्रिया जारी है.  उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही मुआवजे की राशि भी मिल जाएगी.

कूचबिहार के इन ग्रामीणों की पहल ने यह साबित कर दिया है कि देश की सुरक्षा केवल सरकार और सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं होती, बल्कि आम नागरिक भी जरूरत पड़ने पर देशहित में बड़ा योगदान देने के लिए तैयार रहते हैं.

रिपोर्ट: सौम्या शुक्ला