किन शर्तों पर हुई है आशुतोष और सौरभ की रिहाई, जानिए आगे क्या है CJP का प्लान
CJP के को-कॉनवेरनेर सौरव दास और आशुतोष रांका सात दिन की हिरासत के बाद बुधवार शाम तिहाड़ जेल से बाहर आ गए. दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट अदालत ने दोनों को जमानत दे दी. हालांकि, उनकी रिहाई के साथ ही अब इस पूरे मामले में आंदोलन की अगली रणनीति भी सामने आने लगी है.
टीएनपी डेस्क(TNP DESK): CJP के को-कॉनवेरनेर सौरव दास और आशुतोष रांका सात दिन की हिरासत के बाद बुधवार शाम तिहाड़ जेल से बाहर आ गए. दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट अदालत ने दोनों को जमानत दे दी. हालांकि, उनकी रिहाई के साथ ही अब इस पूरे मामले में आंदोलन की अगली रणनीति भी सामने आने लगी है. CJP और उससे जुड़े संगठनों ने 23 अक्टूबर को दिल्ली में जन मार्च का आह्वान किया है जिसको “पीपल अगेंस्ट SIR” का नाम दिया गया है. यह मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच आयोजित करने की तैयारी है.

कोर्ट में शांति बनाए रखने का भरोसा
सौरव दास और आशुतोष रांका ने अदालत को लिखित आश्वासन दिया कि वो शांति भंग नहीं करेंगे और कोई भी विरोध प्रदर्शन संविधान के दायरे में रहकर करेंगे. उन्होंने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के तौर पर डी-नोटिफाई किए जाने तक वहां प्रदर्शन नहीं करने की बात भी कही है.
अदालत ने दोनों के लिखित अंडरटेकिंग को रिकॉर्ड पर लिया. साथ ही, जांच पूरी होने तक 50 हजार रुपये के पर्सनल बॉन्ड और श्योरिटी बॉन्ड भरने का निर्देश दिया. मजिस्ट्रेट ने कहा कि मौजूदा हालात में दोनों को आगे न्यायिक हिरासत में रखने की जरूरत नहीं दिखती. शर्तों के साथ उनकी रिहाई का आदेश दिया गया है.
दिल्ली पुलिस ने दोनों की न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की थी. पुलिस का कहना था कि उनके बयानों और बाद के व्यवहार को देखते हुए शांति व्यवस्था बिगड़ने की आशंका है. मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को दोपहर तीन बजे होगी. दोनों को हर सुनवाई में अदालत के सामने पेश होना होगा.

अब 23 अक्टूबर के जन मार्च पर नजर
रिहाई के बाद आंदोलन से जुड़ा अगला बड़ा कार्यक्रम 23 अक्टूबर का जन मार्च है. इस अभियान में विपक्षी दलों, युवाओं और नागरिक संगठनों से शामिल होने की अपील की गई है. वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने भी इस अपील को साझा किया है.
14 अक्टूबर को छात्र, युवा, किसान, मजदूर, महिलाएं, दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक, दिव्यांग और ट्रांसजेंडर समुदायों से जुड़े संगठनों ने बैठक की थी. इसी बैठक में 'पीपल अगेंस्ट sir' के बैनर तले व्यापक गठबंधन बनाने और जन मार्च निकालने का फैसला लिया गया.
'हर हाथ में तिरंगा, हर गली में जंतर-मंतर' का नारा
इस अभियान के जरिए चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाता सूची के SIR को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. आयोजकों का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में गड़बड़ियां हुई हैं. उन्होंने लोकतंत्र की बहाली की मांग करते हुए देशभर में विरोध के लिए जगह उपलब्ध कराने की बात कही है.
प्रकाश राज, परकला प्रभाकर, राकेश टिकैत और अंजली भारद्वाज समेत कई लोगों के हस्ताक्षर वाली अपील में 'हर हाथ में तिरंगा, हर गली में जंतर-मंतर' के नारे के साथ प्रदर्शन का आह्वान किया गया है. इसमें इंडिया ब्लॉक के दलों से भी साथ आने की अपील है. साथ ही इस मार्च में CJP के फाउन्डर अभिजीत दीपके और ASIA की प्रेसीडेंट नेहा बोरा भी शामिल होंगी

अब नजर इस बात पर रहेगी कि जमानत की शर्तों के बीच CJP और उसके सहयोगी संगठन 23 अक्टूबर के कार्यक्रम को किस रूप में आगे बढ़ाते हैं और विपक्षी दलों की इसमें कितनी भागीदारी होती है. सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई ने इस आंदोलन को एक नया मोड़ दिया है, लेकिन इसकी अगली दिशा जन मार्च और अदालत में होने वाली सुनवाई से तय होगी.