नेपाल-तिब्बत सीमा पर भीषण बाढ़, अब तक 160 लोगों की मौत की खबर, 142 भारतीय लापता
नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में अचानक आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है. इस आपदा में कम से कम 160 लोगों की मौत की खबर है, जबकि 142 भारतीयों समेत बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों की तलाश जारी है.
TNP DESK: नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में बुधवार को अचानक आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले लिया. इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम 160 लोगों की मौत की खबर सामने आई है. वहीं बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं. प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान चलाकर लापता लोगों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है.
142 भारतीयों की भी तलाश जारी
जानकारी के अनुसार, आपदा प्रभावित इलाके में विभिन्न देशों से आए सैकड़ों लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है. इनमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं. करीब 142 भारतीयों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है. विदेशी नागरिकों की संख्या अधिक होने के कारण संबंधित एजेंसियां उनकी पहचान और मौजूदा स्थिति की जानकारी जुटाने में लगी हैं. बताया जा रहा है कि विदेशों से आए 300 से अधिक लोगों के बारे में भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है. बाढ़ के कारण कई इलाकों का सड़क संपर्क बाधित होने से बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं.
भोटे कोशी नदी में अचानक बढ़ा जलस्तर
नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास पानी का स्तर अचानक बढ़ने के बाद भोटे कोशी नदी में तेज बाढ़ आ गई. पानी का बहाव इतना शक्तिशाली था कि इसकी चपेट में कई महत्वपूर्ण ढांचे आ गए. नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सबसे अधिक नुकसान का सामना करना पड़ा.तेज बहाव के कारण कुछ पुल क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि कई मकानों और अन्य इमारतों को भी नुकसान पहुंचा. बाढ़ का पानी कई स्थानों पर अपने साथ मलबा लेकर आया, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में हालात और गंभीर हो गए.
हाइड्रो प्रोजेक्ट को भी भारी नुकसान
इस प्राकृतिक आपदा का असर नेपाल के बुनियादी ढांचे और ऊर्जा परियोजनाओं पर भी पड़ा है. कई हाइड्रो प्रोजेक्ट बाढ़ और मलबे की चपेट में आने से प्रभावित हुए हैं. पुल टूटने और सड़कों के क्षतिग्रस्त होने के कारण कई इलाकों तक पहुंचना कठिन हो गया है. प्रशासन और राहत एजेंसियों के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों को खोजने और प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की है. बाढ़ और भूस्खलन से हुए वास्तविक नुकसान की पूरी तस्वीर राहत एवं बचाव अभियान आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.