TNP DESK: कॉमेडियन समय रैना को ‘इंडियाज गॉट लैटेंट’ मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार, 14 अगस्त को समय रैना और चार अन्य लोगों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को समाप्त करने का निर्देश दिया. अदालत ने मामले से जुड़ी अन्य सभी कार्यवाहियों को भी खत्म करने का आदेश दिया है. यह फैसला आरोपियों की ओर से अदालत के पहले दिए गए निर्देशों का पालन किए जाने के बाद आया है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई की. पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति जेवी मोहना भी शामिल थे. अदालत ने कहा कि समय रैना और अन्य आरोपियों ने पहले दिए गए निर्देशों के अनुसार दिव्यांगजनों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उनके इलाज के लिए धन जुटाने से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए. इन निर्देशों के पालन को देखते हुए अदालत ने आपराधिक कार्यवाही को समाप्त करने का फैसला किया.
पूरा मामला ‘इंडियाज गॉट लैटेंट’ के पहले सत्र के दौरान की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़ा था. कार्यक्रम में दिव्यांगजनों को लेकर की गई टिप्पणियों के बाद विवाद खड़ा हो गया था. इसके बाद समय रैना और अन्य लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हुई. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां अदालत ने आरोपियों को कुछ सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए थे.
27 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना, विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर और निशांत जगदीश तंवर को हर महीने कम से कम दो कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश दिया था. इन कार्यक्रमों का उद्देश्य दिव्यांगजनों की उपलब्धियों को सामने लाना और उनके इलाज के लिए आर्थिक मदद जुटाना था. खास तौर पर रीढ़ की मांसपेशियों को प्रभावित करने वाली बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी से पीड़ित लोगों के लिए धन जुटाने पर जोर दिया गया था.
अदालत ने ये निर्देश कार्यक्रम में दिव्यांगजनों को लेकर की गई कथित असंवेदनशील टिप्पणियों के बाद सुधारात्मक कदम के तौर पर दिए थे. अदालत का उद्देश्य आरोपियों को सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूक करना और दिव्यांगजनों के बीच सकारात्मक संदेश पहुंचाना था.
हालांकि, जुलाई 2026 में मामले में समय रैना के लिए स्थिति कुछ कठिन हो गई थी. 14 जुलाई की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उन पर 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था. अदालत ने कहा था कि उन्होंने न्यायालय के सामने गलत जानकारी दी और पहले दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया. उन्हें दो सप्ताह के भीतर जुर्माने की राशि जमा करने का आदेश दिया गया था.
उस सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा था कि उसे ऐसा प्रतीत होता है कि समय रैना ने न्यायालय को गुमराह करने की कोशिश की. अदालत ने यह भी पाया था कि एक हलफनामा दाखिल किए जाने की बात कही गई, जबकि उसके रिकॉर्ड में ऐसा कोई दस्तावेज मौजूद नहीं था.
अब 14 अगस्त को आए सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश से समय रैना और अन्य आरोपियों को बड़ी कानूनी राहत मिली है. अदालत ने आपराधिक कार्यवाही के साथ मामले से जुड़ी अन्य प्रक्रियाओं को भी समाप्त करने का निर्देश दिया है. इस फैसले के बाद ‘इंडियाज गॉट लैटेंट’ विवाद से जुड़ी कानूनी कार्रवाई फिलहाल खत्म हो गई है.

