कर्नाटक में सियासी भूचाल! डीके शिवकुमार बन सकते हैं नए सीएम, 4 डिप्टी सीएम के नाम भी फाइनल

कर्नाटक में सियासी भूचाल! डीके शिवकुमार बन सकते हैं नए सीएम, 4 डिप्टी सीएम के नाम भी फाइनल

टीनपी डेस्क (TNP DESK): कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिल रहा है. लंबे समय से चल रही खींचतान और अटकलों के बीच आखिरकार सूबे के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इस बड़े घटनाक्रम के बाद अब साफ हो गया है कि कांग्रेस के संकटमोचक और 'कनकपुरा बंडे' (कनकपुरा की चट्टान) के नाम से मशहूर डीके शिवकुमार कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभालने जा रहे हैं. आलाकमान की मंजूरी और ढाई-ढाई साल के कथित फॉर्मूले के तहत हुए इस बदलाव ने राज्य की सियासत में हलचल तेज कर दी है.

डीके शिवकुमार की ताजपोशी और कांग्रेस का जातीय समीकरण

2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की प्रचंड जीत के बाद से ही मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच कड़ा मुकाबला था. उस समय आलाकमान ने सिद्धारमैया को सीएम और डीके शिवकुमार को इकलौता डिप्टी सीएम बनाकर मामला शांत कराया था. हालांकि, शिवकुमार के समर्थक लगातार उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर रहे थे. अब जब सिद्धारमैया ने पद छोड़ दिया है, तो वोक्कालिगा समुदाय से आने वाले और संगठन पर मजबूत पकड़ रखने वाले डीके शिवकुमार की ताजपोशी का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है. शिवकुमार को गांधी परिवार (विशेषकर सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी) का बेहद करीबी माना जाता है, जो इस फैसले के पीछे की एक मुख्य वजह रही है.

डिप्टी सीएम का फॉर्मूला!

सिद्धारमैया एक बड़े ओबीसी (OBC) नेता हैं, और उनके हटने से पिछड़े वर्ग और अन्य समुदायों में किसी तरह की नाराजगी न फैले, इसके लिए कांग्रेस आलाकमान 'सोशल इंजीनियरिंग' का एक नया और बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है. सूत्रों के मुताबिक, कर्नाटक कैबिनेट में संतुलन बनाए रखने के लिए इस बार 4 नए डिप्टी सीएम (Deputy CM) बनाए जा सकते हैं. इन संभावित नामों में  लिंगायत समुदाय से एम.बी. पाटिल या ईश्वर खंडरे (राज्य के सबसे बड़े वोट बैंक को साधने के लिए), दलित (SC/ST) समुदाय से जी. परमेश्वर या सतीश जारकीहोली (पार्टी के पारंपरिक कैडर को मजबूत करने के लिए), ओबीसी (OBC) समुदाय से सिद्धारमैया के किसी खास करीबी या कुरुबा समुदाय के नेता को मौका दिया जा सकता है. वहीं युवा/अल्पसंख्यक चेहरा शिवकुमार के खेमे से प्रियंक खड़गे जैसे नेताओं के नाम की भी चर्चा तेज है ताकि युवाओं को प्रतिनिधित्व मिल सके.

नए मुख्यमंत्री के सामने चुनौतियां और 2028 का लक्ष्य

डीके शिवकुमार का मुख्यमंत्री बनना उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है, लेकिन उनके आगे का रास्ता कांटों भरा है. कर्नाटक का राजनीतिक इतिहास रहा है कि पिछले चार दशकों से वहां कोई भी सत्ताधारी दल लगातार दोबारा चुनाव नहीं जीत पाया है. अब शिवकुमार के पास सरकार चलाने के लिए दो साल से भी कम का समय बचा है.

उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य में एंटी-इनकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) को कम करना, विपक्ष (बीजेपी-जेडीएस गठबंधन) के तीखे हमलों का सामना करना और कांग्रेस के आंतरिक असंतोष को संभालना होगी. इसके अलावा, सिद्धारमैया के समर्थकों को अपने साथ लेकर चलना भी उनके लिए एक बड़ी परीक्षा होगी. बहरहाल, कर्नाटक में इस बड़े सत्ता परिवर्तन के बाद अब सभी की निगाहें डीके शिवकुमार के शपथ ग्रहण समारोह और नए कैबिनेट के गठन पर टिकी हैं.