20 जुलाई से शुरू होगा संसद का मानसून सत्र, कई अहम मुद्दों पर सरकार-विपक्ष होंगे आमने-सामने

संसद का मानसून सत्र 25 दिनों तक चलेगा. सरकार कई अहम विधेयक पेश करेगी, जबकि विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, किसानों और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है.

20 जुलाई से शुरू होगा संसद का मानसून सत्र, कई अहम मुद्दों पर सरकार-विपक्ष होंगे आमने-सामने

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा. करीब 25 दिनों तक चलने वाले इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों और राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है. भारत सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद का मानसून सत्र 2026 बुलाने को औपचारिक मंजूरी दे दी है. सत्र के दौरान सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगी, जबकि विपक्ष भी विभिन्न जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है. सत्र की जानकारी संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने दी.

चुनावी नतीजों के बाद बदला राजनीतिक माहौल

इस बार का मानसून सत्र ऐसे समय में हो रहा है जब हाल ही में पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों के नतीजों ने राजनीतिक माहौल बदल दिया है. खासकर पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगियों की बड़ी जीत के बाद संसद में राजनीतिक माहौल और भी गर्म रहने की संभावना है. माना जा रहा है कि चुनावी परिणामों का असर विभिन्न दलों की रणनीति और सदन की कार्यवाही में भी दिखाई देगा.

On the recommendation of the Govt of India, Hon’ble President, Smt. Droupadi Murmu ji has approved the summoning of both the Houses of Parliament for the Monsoon Session 2026.
The Session will commence on 20 July, 2026 and continue till 13 August, 2026 for meaningful debate,… pic.twitter.com/TaEYH4F1cK

— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) July 4, 2026

तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) पर रहेगी नजर

मानसून सत्र में तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) से जुड़े घटनाक्रम भी चर्चा में रह सकते हैं. दोनों दलों के कुछ सांसदों ने अलग गुट के रूप में मान्यता देने की मांग की है. इस मामले में अंतिम फैसला लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लेना है. जानकारी के अनुसार तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसद और शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद अलग पहचान की मांग कर रहे हैं. अध्यक्ष के फैसले का असर दोनों दलों की संसदीय स्थिति पर पड़ सकता है.

सरकार और विपक्ष के बीच होगी जोरदार बहस

सरकार इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन में पेश कर सकती है. वहीं विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं, राष्ट्रीय सुरक्षा और अन्य जनहित के मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है. ऐसे में संसद के दोनों सदनों में कई विषयों पर तीखी बहस और राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है.

पिछला सत्र सरकार के लिए नहीं रहा था सफल

पिछले संसद सत्र में सरकार अपने कुछ अहम विधेयकों को पारित कराने में सफल नहीं हो सकी थी. वर्ष 2029 से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने तथा लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा से मंजूरी नहीं मिल पाई थी. अब सरकार इन लंबित प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी.

क्यों महत्वपूर्ण है यह मानसून सत्र

20 जुलाई से शुरू होने वाला यह संसद सत्र केवल कानून बनाने की प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेगा. चुनावी माहौल, लंबित विधेयक, राजनीतिक समीकरण और विपक्ष की रणनीति को देखते हुए यह सत्र देश की राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है. आने वाले दिनों में सदन में होने वाली बहस और फैसलों पर पूरे देश की नजर रहेगी.