TBP DESK:NEET पेपर लीक मामले को लेकर राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है. हालात को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन जंतर-मंतर के आसपास स्थित 18 मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है. सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे और किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके. प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे व्यंग्यात्मक राजनीतिक संगठन 'कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)' ने केंद्र सरकार पर अपनी मांगों को लेकर जल्द फैसला लेने का दबाव बनाया है. प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है. इसी मुद्दे पर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच शनिवार को एक बार फिर बातचीत होने की संभावना है.
प्रदर्शनकारी संगठन का कहना है कि सरकार ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर विचार करने के लिए शनिवार दोपहर तक का समय मांगा है. संगठन के नेताओं का दावा है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में छात्र, अभिभावक और सामाजिक कार्यकर्ता एकत्र होकर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं. प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर कई इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है और लोगों से आवश्यक होने पर ही उस क्षेत्र में आने की अपील की है. मेट्रो स्टेशनों के बंद होने से यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह भी दी गई है.
इसी बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में अपना 26 दिन लंबा अनशन समाप्त कर दिया. उन्होंने गुरुवार देर रात केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और अपनी पत्नी गीतांजलि आंगमो की मौजूदगी में उपवास खत्म किया. शुक्रवार देर रात जारी करीब 24 मिनट के एक वीडियो संदेश में वांगचुक ने बताया कि उन्होंने सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद यह फैसला लिया. उनके अनुसार सरकार ने तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भरोसा दिलाया है. पहला, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और 20 जुलाई को आयोजित 'संसद चलो' कार्यक्रम में शामिल लोगों के खिलाफ किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी. दूसरा, कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के मुद्दे पर सरकार सकारात्मक कदम उठाएगी. तीसरा, NEET पेपर लीक मामले पर संसद में विस्तृत चर्चा कराई जाएगी ताकि पूरे प्रकरण की जवाबदेही तय हो सके.
वांगचुक ने अपने संदेश में कहा कि छात्रों की आवाज लोकतांत्रिक तरीके से सुनी जानी चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करना सरकार की जिम्मेदारी है. उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार अपने लिखित आश्वासनों का पालन करेगी और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी तथा विश्वसनीय बनाने के लिए ठोस कदम उठाएगी. वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनकारी संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी प्रमुख मांगों पर संतोषजनक निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा. अब सभी की नजर शनिवार को होने वाली वार्ता पर टिकी है, जहां इस विवाद के समाधान की दिशा में कोई महत्वपूर्ण फैसला सामने आ सकता है.

