मोदी की इंडोनेशिया यात्रा बनेगी गेमचेंजर, UPI से लेकर रक्षा तक होंगे बड़े समझौते

मोदी की इंडोनेशिया यात्रा बनेगी गेमचेंजर, UPI से लेकर रक्षा तक होंगे बड़े समझौते

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन दिवसीय इंडोनेशिया यात्रा को भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों में एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. इस यात्रा से दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होने की उम्मीद है. खासकर डिजिटल तकनीक, भुगतान प्रणाली, रक्षा सहयोग और व्यापार जैसे क्षेत्रों में नए समझौते और नई दिशा देखने को मिल सकती है.

इस यात्रा का सबसे अहम पहलू डिजिटल पेमेंट सिस्टम से जुड़ा समझौता माना जा रहा है. भारत का यूपीआई और इंडोनेशिया का क्यूरिस सिस्टम आपस में जोड़े जाने की तैयारी है. इससे दोनों देशों के बीच डिजिटल लेनदेन आसान और तेज हो जाएगा. खासकर भारतीय पर्यटकों को बड़ा फायदा मिलेगा जो बाली और इंडोनेशिया के अन्य पर्यटन स्थलों पर जाते हैं. अब उन्हें भुगतान के लिए अलग अलग परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा. इसके साथ ही दोनों देशों के व्यापारियों के लिए भी यह सिस्टम काफी उपयोगी साबित होगा.

इंडोनेशिया भारत के विकास मॉडल से लगातार प्रेरणा ले रहा है. भारत की कई डिजिटल और आर्थिक योजनाओं को वहां अपनाने पर काम चल रहा है. भारत सरकार भी इस दिशा में पूरा सहयोग कर रही है. इंडोनेशिया का ओपन नेटवर्क आईओएन भारत के ओएनडीसी मॉडल से प्रेरित है. इसका उद्देश्य डिजिटल व्यापार को आसान और सस्ता बनाना है.

इस यात्रा के दौरान एक और बड़ा कदम 7 जुलाई को देखने को मिल सकता है. प्रधानमंत्री मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांटो की बैठक में आईओएन का पहला लाइव ट्रांजेक्शन किया जा सकता है. यह सिस्टम छोटे और मध्यम स्तर के व्यापारियों के लिए बहुत मददगार होगा. इससे लाखों उद्यमियों को डिजिटल बाजार तक पहुंच मिलेगी और कम लागत में व्यापार करना आसान हो जाएगा.

इंडोनेशिया ने भारत के आधार, यूपीआई, डिजिलॉकर और ई केवाईसी जैसे डिजिटल सिस्टम से प्रेरित होकर अपनी डिजिटल नुसंतारा पहल शुरू की है. इसका लक्ष्य देश में डिजिटल सेवाओं को और मजबूत बनाना है. भारतीय कंपनियां भी इंडोनेशिया के डिजिटल ढांचे को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. इससे दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग और गहरा होता जा रहा है.

डिजिटल क्षेत्र के साथ साथ स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में भी साझेदारी बढ़ रही है. इंडोनेशिया ने भारत की पीएम पोषण यानी मिड डे मील योजना से प्रेरणा लेकर फ्री न्यूट्रिशियस मील्स प्रोग्राम शुरू किया है. इसके अलावा सस्ती दवाओं के लिए भारत की जन औषधि योजना पर भी चर्चा हो रही है. इसका सीधा फायदा आम लोगों को मिल सकता है.

रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है. इंडोनेशिया भारत के साथ डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, तकनीक हस्तांतरण, सैन्य प्रशिक्षण और समुद्री सुरक्षा पर काम कर रहा है. भारत के आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत विकसित रक्षा तकनीकें दोनों देशों के बीच साझेदारी को और मजबूत कर रही हैं. ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली जैसे प्रोजेक्ट पर भी बातचीत की चर्चा है. हिंद प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और संयुक्त अभ्यास को लेकर भी सहयोग बढ़ रहा है.

इसके अलावा क्रिटिकल मिनरल्स यानी महत्वपूर्ण खनिज संसाधन भी इस साझेदारी का बड़ा हिस्सा बन रहे हैं. इंडोनेशिया के पास निकल और अन्य दुर्लभ खनिजों के बड़े भंडार हैं, जो इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरियों और आधुनिक उद्योगों के लिए बहुत जरूरी हैं. अभी इनका अधिकतर हिस्सा कच्चे रूप में निर्यात किया जाता है, लेकिन अब इंडोनेशिया इन्हें देश के भीतर प्रोसेस करने पर जोर दे रहा है.

भारत के लिए यह एक बड़ा अवसर है क्योंकि वह भी इन खनिजों की सप्लाई चेन में अपनी भूमिका मजबूत करना चाहता है. ऐसे में दोनों देशों के बीच सहयोग से वैश्विक स्तर पर एक मजबूत और स्थिर सप्लाई नेटवर्क तैयार हो सकता है.