500 साल पुराना इतिहास चुराकर ले गए बदमाश, मध्य प्रदेश में 3 हज़ार किलो की तोप चोरी

500 साल पुराना इतिहास चुराकर ले गए बदमाश, मध्य प्रदेश में 3 हज़ार किलो की तोप चोरी

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित ऐतिहासिक नरवर किले से एक बेहद चौंकाने वाली चोरी की घटना सामने आई है. किले में रखी सिंधिया राजवंश के समय की करीब 500 साल पुरानी अष्टधातु की तोप को हथियारबंद बदमाश चोरी कर ले गए. इस घटना ने न सिर्फ इलाके में सनसनी फैला दी है, बल्कि ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

नरवर किला मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल है. यहां लंबे समय से कई प्राचीन हथियार और वस्तुएं संरक्षित रखी गई थीं. किले के ओपन कचहरी परिसर में कुल 14 ऐतिहासिक तोपें रखी गई थीं. लेकिन अब इनमें से एक बेहद खास तोप गायब हो चुकी है और परिसर में केवल 13 तोपें ही बची हैं.

हथियारों से लैस होकर पहुंचे बदमाश

पुलिस जांच के अनुसार, यह घटना 5 और 16 जुलाई की रात के बीच हुई. करीब 25 से 30 हथियारबंद बदमाश रात के अंधेरे में नरवर किले में दाखिल हुए. बदमाश पूरी तैयारी के साथ आए थे. उनके पास क्रेन और भारी वाहन जैसे उपकरण मौजूद थे, जिनकी मदद से उन्होंने करीब 3000 किलो वजनी अष्टधातु की तोप को उठाया और अपने साथ ले गए.

घटना के समय किले में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि बदमाशों के पास आधुनिक हथियार थे. उन्होंने सुरक्षा कर्मचारियों को धमकाकर पीछे हटने पर मजबूर कर दिया. सुरक्षाकर्मियों के अनुसार, उनके पास बचाव के लिए सिर्फ लाठियां थीं. वहीं किले में पर्याप्त रोशनी और निगरानी की सुविधाओं की कमी भी सामने आई है.

पहले से थी चोरी की तैयारी

जांच में पुलिस को कई अहम सुराग मिले हैं. शुरुआती जांच में सामने आया है कि बदमाश किले के पिछले हिस्से से अंदर पहुंचे थे. उन्हें पहले से जानकारी थी कि तोप कहां रखी गई है और उसे बाहर ले जाने के लिए किस तरह की तैयारी करनी होगी.

इतनी बड़ी संख्या में लोगों का एक साथ पहुंचना और भारी मशीनों का इस्तेमाल करना इस बात की ओर इशारा करता है कि वारदात अचानक नहीं हुई, बल्कि इसकी पूरी योजना पहले से बनाई गई थी.

स्थानीय लोगों के मुताबिक, घटना से करीब 12 दिन पहले भी किले और आसपास कुछ संदिग्ध गतिविधियां देखी गई थीं. इसकी जानकारी प्रशासन को दी गई थी, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत नहीं किया गया. अगर समय रहते निगरानी बढ़ाई जाती तो शायद इस चोरी को रोका जा सकता था.

ऐतिहासिक महत्व रखती थी तोप

चोरी हुई तोप 16वीं शताब्दी की बताई जा रही है. यह उस दौर की सैन्य तकनीक और धातु निर्माण कला का बेहतरीन उदाहरण थी. अष्टधातु से बनी इस तोप पर की गई नक्काशी और ऐतिहासिक निशान इसे बेहद खास बनाते हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी ऐतिहासिक वस्तुओं की कीमत सिर्फ पैसों से तय नहीं की जा सकती. ये किसी राज्य और देश की विरासत होती हैं. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय एंटीक बाजार में ऐसी दुर्लभ वस्तुओं की कीमत करोड़ों रुपये तक पहुंच सकती है. इसी वजह से पुलिस को आशंका है कि इसके पीछे किसी बड़े तस्करी नेटवर्क का हाथ हो सकता है.

जांच में जुटी पुलिस

घटना के बाद पुलिस ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ डकैती और अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस की कई टीमें जांच में जुटी हैं. किले और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा रही है. इसके अलावा साइबर सेल की मदद से उन लोगों और गिरोहों की जानकारी जुटाई जा रही है जो ऐतिहासिक वस्तुओं की अवैध खरीद फरोख्त से जुड़े हो सकते हैं.

नरवर किले से हुई यह चोरी सिर्फ एक तोप के गायब होने का मामला नहीं है, बल्कि देश की ऐतिहासिक विरासत की सुरक्षा पर बड़ा सवाल है. अब देखना होगा कि पुलिस इस दुर्लभ धरोहर को वापस लाने में कितनी जल्दी सफलता हासिल कर पाती है.