संकट में ममता बनर्जी : तृणमूल की महिला ब्रिगेड ही बन गईं हैं बड़ी परेशानी ,अब कैसे निबटेंगी

संकट में ममता बनर्जी : तृणमूल की महिला ब्रिगेड ही बन गईं हैं बड़ी परेशानी ,अब कैसे निबटेंगी

TNP DESK- जिन चमकते चेहरों  पर ममता बनर्जी ने सबसे अधिक भरोसा किया, उन्हीं लोगों ने ममता का साथ छोड़ दिया।  इन्हीं चमकते चेहरों की बदौलत तृणमूल कांग्रेस  बंगाल की राजनीति में छा गई थी.  लेकिन जब बुरा वक्त आया तो इस "महिला ब्रिगेड"  ने उनका  साथ छोड़ दिया।  पार्टी की स्थापना सदस्य में शामिल काकोली घोष दस्तीदार ने सबसे पहले ममता का साथ छोड़ा।  उन्होंने केवल पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया, बल्कि कई सवाल भी खड़े किये।  कुल  28 में से 20  सांसदों के उनके साथ होने का दावा किया है.  सबसे आश्चर्य लोगों को सयानी घोष को लेकर हो रहा है.  विधानसभा चुनाव में सयानी घोष स्टार प्रचारक बनी हुई थी और वह ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री बनाने का दावा कर रही थी.  लेकिन उन्होंने भी साथ छोड़ दिया है.  वजह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है, जबकि  ममता बनर्जी ने सयानी  घोष पर पूरा भरोसा किया। 

सयानी घोष को लेकर हो रही सबसे अधिक चर्चा ----

 2021 में पार्टी में शामिल होने वाली एक्ट्रेस सयानी घोष बहुत जल्द ही पार्टी का चर्चित चेहरा बन गई.  आसनसोल से अपना पहला विधानसभा चुनाव हार गई, लेकिन फिर ममता बनर्जी ने भरोसा जताकर उनको यूथ  तृणमूल  कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया।  उसके बाद जादवपुर से चुनाव लड़वाया, जहां से वह भारी मतों से जीत हासिल की.  उसके बाद वह महिला शाखा  की अध्यक्ष बनाई गई.  2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ बयान देकर काफी चर्चा में रही.  उन्होंने पार्टी के लिए जमकर चुनाव प्रचार किया।  बोलने की कला ऐसी कि  लोग  उनमें ममता की छवि देखने लगे थे. लेकिन वह भी बागी  हो गई.  बताया जाता है कि टीएमसी की फायर ब्रांड नेता रही सयानी  घोष पांच सांसदों के साथ भूपेंद्र यादव के घर बैठक में पहुंची थी. 

जिनको अपना माना ,वही खड़े हैं विरोध में ----
 
और लोगों की बात की जाए तो शताब्दी राय को भी ममता बनर्जी ने शुरुआती दौर में राजनीति में उतारा था.  वह 2009 में बीरभूम से सांसद चुनी गई थी.  तब से इस सीट पर उनका ही कब्जा है.  चार बार लगातार जीतने वाली शताब्दी राय भी अब बागी  हो चुकी हैं.  रचना बनर्जी बंगाल के घर-घर में दीदी नंबर वन के नाम से प्रसिद्ध है.  उनको  ममता बनर्जी ने 2024 के चुनाव में पहली बार राजनीति में उतारा था.  जून मालिया बंगाली टीवी और फिल्मों का मशहूर चेहरा है.  मेदिनीपुर से सांसद जून मालिया पहले ममता दीदी के अपमान का बदला लेना चाहती थी, लेकिन अब वह बागियों  की लिस्ट में शामिल हो गई है.  ममता बनर्जी  कांग्रेस से अलग होकर अपनी नई पार्टी तृणमूल  कांग्रेस बनाई थी.  

मुश्किल दौर से गुजर रही हैं ममता  बनर्जी ------

नई पार्टी में एक से एक चेहरे जुड़ते चले गए लेकिन 2026 का विधानसभा चुनाव ममता बनर्जी के लिए मुश्किल साबित हुआ और अब पार्टी और चुनाव चिन्ह भी उनके हाथ से निकलता दिख रहा है.  यह  अलग बात है कि चर्चा थी कि बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा भी ममता के खिलाफ हैं ,लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि बुरे वक्त में वह ममता बनर्जी का साथ नहीं छोड़ेंगे।  चर्चा थी कि तृणमूल कांग्रेस को ममता बनर्जी कांग्रेस में शामिल करने की कोशिश कर रही है ,लेकिन कांग्रेस की ओर से अधिकृत रूप से कहा गया है कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है.  वैसे ममता बनर्जी कोलकाता से लेकर दिल्ली तक जमीन तलाश रही है.  विपक्षी पार्टियों का उन्हें सहयोग मिल रहा है लेकिन आगे होगा क्या ,यह कहना कठिन है,  अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को लेकर भी ममता बनर्जी दल के नेताओं के निशाने पर हैं.