TNP DESK- पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणाम आते ही पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ खेल शुरू हो गया था. तृणमूल कांग्रेस के विधायकों के बाद अब सांसद भी साथ छोड़ने लगे हैं. ममता बनर्जी के सामने बड़ा सियासी संकट पैदा हो गया है. ममता बनर्जी कोलकाता से लेकर दिल्ली तक दौड़ लगा चुकी है, लेकिन उनके इस संकट की घड़ी में दो बिहारी सांसद मजबूती से ममता दीदी के साथ खड़े हैं. एक शत्रुघ्न सिन्हा और दूसरे कीर्ति आजाद, दोनों बंगाल से सांसद हैं और दोनों के संकट के समय ममता बनर्जी ने उनकी मदद की थी. अब दोनों सांसद खुलेआम कह रहे हैं कि जब हम लोगों के बुरे वक्त में ममता बनर्जी ने साथ दिया, तो हम लोगों का भी फर्ज बनता है कि ममता बनर्जी के कठिन समय में उनका सहयोग करें।
चुनाव के पहले से ही हो रही थी तैयारी
बता दें कि ममता बनर्जी ने जिन पर सबसे अधिक भरोसा किया ,उन्हीं लोगों ने पहले साथ छोड़ा। सूत्र तो बता रहे हैं कि चुनाव के पहले से ही तृणमूल कांग्रेस में भाजपा के लोग शामिल हो गए थे. इसमें सबसे बड़ा नाम काकोली घोष दस्तीदार का लिया जा रहा है. हालांकि वह पार्टी के संस्थापक सदस्यों में रही हैं. सूत्र तो बता रहे हैं कि विधायकों के बाद अपने सांसदों से चोट खाई ममता बनर्जी रास्ता तलाश कर रही है. फिलहाल पार्टी के चुनाव चिन्ह पर भी खतरा उत्पन्न हो गया है. सबसे अधिक चोट महिला ब्रिगेड ने किया है. बिहारी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद केवल ममता बनर्जी के साथ खड़े नहीं दिख रहे हैं, बल्कि पार्टी छोड़कर जाने वालों को नसीहत भी दे रहे है.
सत्ता क्या बदली शुरू हो गया विखराव
पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलते ही ममता बनर्जी की पार्टी में बिखराव और बगावत शुरू हो गया था. 60 विधायकों के बागी होने के बाद सांसदों ने बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है. तीन राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा दे दिया है और 19 लोकसभा सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर अलग पार्टी बनाने की मांग की है, पार्टी की स्थापना सदस्य में शामिल काकोली घोष दस्तीदार ने सबसे पहले ममता का साथ छोड़ा। उन्होंने केवल पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया, बल्कि कई सवाल भी खड़े किये. कुल 28 में से 20 सांसदों के उनके साथ होने का दावा किया है. सबसे आश्चर्य लोगों को सयानी घोष को लेकर हो रहा है. विधानसभा चुनाव में सयानी घोष स्टार प्रचारक बनी हुई थी और वह ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री बनाने का दावा कर रही थी. लेकिन उन्होंने भी साथ छोड़ दिया है. वजह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है, जबकि ममता बनर्जी ने सयानी घोष पर पूरा भरोसा किया.
सयानी घोष को लेकर पूरे देश में हो रही चर्चा
2021 में पार्टी में शामिल होने वाली एक्ट्रेस सयानी घोष बहुत जल्द ही पार्टी का चर्चित चेहरा बन गई. आसनसोल से अपना पहला विधानसभा चुनाव हार गई, लेकिन फिर ममता बनर्जी ने भरोसा जताकर उनको यूथ तृणमूल कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया. उसके बाद जादवपुर से चुनाव लड़वाया, जहां से वह भारी मतों से जीत हासिल की. उसके बाद वह महिला शाखा की अध्यक्ष बनाई गई. 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ बयान देकर काफी चर्चा में रही. उन्होंने पार्टी के लिए जमकर चुनाव प्रचार किया। बोलने की कला ऐसी कि लोग उनमें ममता की छवि देखने लगे थे. लेकिन वह भी बागी हो गई.
ममता दीदी ने जिन पर किया था अधिक भरोसा ,वही पहले टूटे
बताया जाता है कि टीएमसी की फायर ब्रांड नेता रही सयानी घोष पांच सांसदों के साथ भूपेंद्र यादव के घर बैठक में पहुंची थी. और लोगों की बात की जाए तो शताब्दी राय को भी ममता बनर्जी ने शुरुआती दौर में राजनीति में उतारा था. वह 2009 में बीरभूम से सांसद चुनी गई थी. तब से इस सीट पर उनका ही कब्जा है. चार बार लगातार जीतने वाली शताब्दी राय भी अब बागी हो चुकी हैं. रचना बनर्जी बंगाल के घर-घर में दीदी नंबर वन के नाम से प्रसिद्ध है. उनको ममता बनर्जी ने 2024 के चुनाव में पहली बार राजनीति में उतारा था. जून मालिया बंगाली टीवी और फिल्मों का मशहूर चेहरा है. मेदिनीपुर से सांसद जून मालिया पहले ममता दीदी के अपमान का बदला लेना चाहती थी, लेकिन अब वह बागियों की लिस्ट में शामिल हो गई है. ममता बनर्जी कांग्रेस से अलग होकर अपनी नई पार्टी तृणमूल कांग्रेस बनाई थी.

