भारत का बड़ा टेक कदम: 'व्हाइट रैबिट' नेटवर्क हुआ लॉन्च, अब GPS पर निर्भरता होगी कम

भारत का बड़ा टेक कदम: 'व्हाइट रैबिट' नेटवर्क हुआ लॉन्च, अब GPS पर निर्भरता होगी कम

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): भारत ने टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाया है. केंद्र सरकार ने ‘व्हाइट रैबिट’ तकनीक पर आधारित एक नया नेटवर्क शुरू किया है. इसका मकसद पूरे देश में एक जैसा और बेहद सटीक समय उपलब्ध कराना है. सरकार का कहना है कि यह सिस्टम नैनोसेकंड से भी कम समय की सटीकता के साथ काम करेगा.

आसान भाषा में समझें तो अब देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद कंप्यूटर, मशीन और डिजिटल सिस्टम एक ही सही समय के हिसाब से काम कर पाएंगे. इस पहल को ‘एक देश, एक समय’ के लक्ष्य से जोड़ा जा रहा है.

क्या है व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी?

व्हाइट रैबिट एक एडवांस टाइम सिंक्रोनाइजेशन टेक्नोलॉजी है. इसका काम अलग-अलग जगहों पर मौजूद हजारों डिवाइस और नेटवर्क को एक ही समय के साथ जोड़ना है.

जैसे हमारे मोबाइल और कंप्यूटर में समय सही होना जरूरी होता है, वैसे ही बड़े सिस्टम में भी सही समय का तालमेल बेहद जरूरी होता है. बैंकिंग, टेलीकॉम और रक्षा जैसे क्षेत्रों में कुछ सेकंड की गलती भी बड़ी परेशानी पैदा कर सकती है. इसी समस्या को दूर करने के लिए व्हाइट रैबिट तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है.

विदेशी GPS पर कम होगी निर्भरता

अभी कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सटीक समय के लिए विदेशी सिस्टम और GPS जैसी सेवाओं पर निर्भरता रहती है. लेकिन इस नए नेटवर्क के आने के बाद भारत अपना खुद का सटीक समय सिस्टम और मजबूत बना सकेगा.

इसका सबसे बड़ा फायदा बैंकिंग, टेलीकॉम, बिजली ग्रिड, ट्रांसपोर्ट और डिजिटल सेवाओं को मिलेगा. उदाहरण के तौर पर बैंकिंग सेक्टर में हर लेनदेन का सही समय दर्ज होना जरूरी होता है. वहीं टेलीकॉम नेटवर्क और बिजली व्यवस्था को भी बेहतर तरीके से चलाने के लिए सही समय का तालमेल काफी अहम होता है.

CSIR और ISRO ने मिलकर तैयार किया सिस्टम

इस प्रोजेक्ट को उपभोक्ता मामले विभाग, सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (CSIR-NPL) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने मिलकर तैयार किया है.

यह सिस्टम भारतीय मानक समय यानी IST को और ज्यादा सटीक तरीके से देशभर तक पहुंचाने के लिए बनाया गया है. भारत में आधिकारिक समय निर्धारण का काम CSIR-NPL करता है.

केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बेंगलुरु स्थित रीजनल रेफरेंस स्टैंडर्ड लैबोरेटरी में इस नेटवर्क की शुरुआत की.

बैंकिंग से लेकर रक्षा तक मिलेगा फायदा

इस नई तकनीक का फायदा कई जरूरी क्षेत्रों में देखने को मिलेगा. बैंकिंग सिस्टम में सुरक्षित ट्रांजेक्शन, टेलीकॉम नेटवर्क की बेहतर स्पीड, बिजली ग्रिड का सही संचालन और रक्षा क्षेत्र में सटीक तालमेल के लिए यह काफी मददगार साबित हो सकती है.

इसके अलावा डिजिटल इंडिया के तहत चल रही कई सेवाओं में भी सही समय की जरूरत होती है. ऐसे में यह नेटवर्क देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करने में मदद करेगा.

टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम

‘व्हाइट रैबिट’ नेटवर्क भारत को समय निर्धारण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. इससे देश को महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए विदेशी सिस्टम पर कम निर्भर रहना पड़ेगा.

आने वाले समय में यह तकनीक भारत के डिजिटल सिस्टम को और तेज और सुरक्षित बना सकती है. ‘एक देश, एक समय’ की यह पहल भारत के तकनीकी विकास में एक नया अध्याय जोड़ने वाली साबित हो सकती है.