नेपाल बाढ़: लापता लोगों की पहचान में भारत की पहल, बेंगलुरु में शुरू हुआ DNA सेंटर

नेपाल में भयावह बाढ़ के बाद अब तक 1344 शव बरामद किए गए हैं, लेकिन केवल 98 की पहचान हो सकी है. अज्ञात शवों की पहचान के लिए DNA जांच की जा रही है, जिसमें भारत के फोरेंसिक विशेषज्ञ भी नेपाल की मदद कर रहे हैं.

नेपाल बाढ़: लापता लोगों की पहचान में भारत की पहल, बेंगलुरु में शुरू हुआ DNA सेंटर

टिएनपी डेस्क (TNP DESK): नेपाल में आई भयावह बाढ़ के बाद तबाही की तस्वीर लगातार सामने आ रही है. बाढ़ और उसके मलबे से अब तक 1344 शव बरामद किए जा चुके हैं. बड़ी चुनौती उन शवों की पहचान करना है, जिनकी पहचान अभी तक नहीं हो सकी है. अधिकारियों के मुताबिक, अब तक केवल 98 शवों की पहचान के बाद उन्हें उनके परिवारों को सौंपा जा सका है. बाकी शवों की पहचान के लिए डीएनए जांच का सहारा लिया जा रहा है.

नेपाल में अज्ञात शवों की पहचान करने में भारत भी मदद कर रहा है. भारत से फोरेंसिक विशेषज्ञों की एक टीम नेपाल पहुंची है. विशेषज्ञ डीएनए के जरिए शवों की पहचान करने में स्थानीय अधिकारियों की मदद कर रहे हैं.

सैकड़ों शवों को अस्थायी रूप से दफनाया गया

बाढ़ में जान गंवाने वाले बड़ी संख्या में लोगों की पहचान नहीं होने के कारण शवों को अस्थायी रूप से दफनाना पड़ा है. अधिकारियों के अनुसार, अब तक 1030 शवों को अस्थायी रूप से दफनाया गया है. इन शवों से डीएनए नमूने लिए गए हैं, ताकि बाद में परिवार के सदस्यों के नमूनों से उनका मिलान किया जा सके.

नेपाल पुलिस ने अब तक कुल 2272 डीएनए नमूने जमा किए हैं. इनमें 1260 नमूने शवों से लिए गए हैं, जबकि 1012 नमूने ऐसे परिवारों और रिश्तेदारों से लिए गए हैं, जो बाढ़ के बाद से अपने लोगों की तलाश कर रहे हैं.

बेंगलुरु में बनाया गया नोडल सेंटर

नेपाल में लापता लोगों की तलाश कर रहे भारतीय परिवारों की मदद के लिए बेंगलुरु में भी विशेष व्यवस्था की गई है. बोरिंग और लेडी कर्जन अस्पताल में एक नोडल सेंटर बनाया गया है. यहां नेपाल बाढ़ से प्रभावित लोगों के करीबी रिश्तेदार अपने डीएनए नमूने दे सकते हैं.

अस्पताल के डायरेक्टर और डीन डॉ. श्रीनिवासुलु नायडू के अनुसार, सरकार के निर्देश पर यह सेंटर बनाया गया है. यहां परिवार के सदस्यों के रक्त के नमूने जमा किए जाएंगे. इन नमूनों को जांच के लिए फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी भेजा जाएगा.

पहचान पत्र लेकर दे सकते हैं डीएनए सैंपल

अस्पताल के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. नागेश कुप्पास्ट ने बताया कि अपने लापता रिश्तेदार की तलाश कर रहे लोग वैध पहचान पत्र के साथ सेंटर पहुंच सकते हैं. यहां डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के लिए उनके नमूने लिए जाएंगे.

डीएनए मिलान में करीबी रिश्तेदारों के नमूने ज्यादा मददगार साबित होते हैं. पिता, माता, बेटा या बेटी जैसे फर्स्ट-डिग्री रिश्तेदारों के डीएनए से करीब 50 प्रतिशत मिलान की संभावना रहती है. सेकंड-डिग्री रिश्तेदारों के मामले में यह करीब 25 प्रतिशत रह जाती है.

परिवारों तक शव पहुंचाना बड़ी चुनौती

नेपाल में राहत और बचाव अभियान के साथ मृतकों की पहचान का काम भी जारी है. बड़ी संख्या में शव मिलने के कारण प्रशासन के सामने उनकी सही पहचान कर परिवारों तक पहुंचाने की बड़ी चुनौती है.

डीएनए नमूनों के मिलान से उन परिवारों को अपने लापता रिश्तेदारों के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद है, जो अब भी उनकी तलाश कर रहे हैं. भारत के फोरेंसिक विशेषज्ञ और नेपाल की एजेंसियां मिलकर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही हैं.