टीएनपी डेस्क (TNP DESK): NEET पेपर लीक में गड़बड़ियों और शिक्षा व्यवस्था को लेकर देशभर में लगातार हो रहे छात्र आंदोलनों के बीच अब पर्यावरण और जनहित के मुद्दों को लेकर भी विरोध तेज हो गया है. इसी कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक ने 20 जुलाई को संसद तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने का ऐलान किया है. उन्होंने देशभर के लोगों से दिल्ली पहुंचकर इस अभियान में शामिल होने की अपील की है. यह मार्च संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के दिन जंतर-मंतर से शुरू होकर संसद की ओर जाएगा. वांगचुक का कहना है कि इस मार्च का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों का ध्यान उन अहम मुद्दों की ओर आकर्षित करना है, जिन पर लंबे समय से पर्याप्त चर्चा नहीं हो रही है.
सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स(x) पर एक संदेश जारी करते हुए कहा कि उन्हें लगातार लोग भूख हड़ताल खत्म करने की सलाह दे रहे हैं. हालांकि उनका मानना है कि केवल अनशन समाप्त कर देने से उन समस्याओं का समाधान नहीं होगा, जिनके लिए उन्होंने यह आंदोलन शुरू किया है. उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि छात्रों, पर्यावरण और लद्दाख जैसे संवेदनशील क्षेत्र के भविष्य से जुड़े सवालों के लिए है.
PEACEFUL MARCH TO THE PARLIAMENT, 20th JULY
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 8, 2026
Thanks for all your messages to break my Hunger Strike, but that wouldn't help the 20 students who committed suicide nor will that help protect the mountains of Ladakh or the rivers of India. If you really want to help then do a little… pic.twitter.com/XvQ1CRIlTW
उन्होंने अपने समर्थकों से अपील की कि यदि वे वास्तव में इस आंदोलन का समर्थन करना चाहते हैं, तो केवल सोशल मीडिया पर संदेश भेजने तक सीमित न रहें. इसके बजाय 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचें और शांतिपूर्ण तरीके से संसद मार्च में शामिल हों. उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाना ही इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है.
वांगचुक का कहना है कि वह चाहते हैं कि सांसद इन मुद्दों को संसद में उठाएं और इनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएं. उनका मानना है कि पर्यावरण संरक्षण, पहाड़ी क्षेत्रों की सुरक्षा और युवाओं से जुड़े विषय केवल किसी एक राज्य या क्षेत्र के नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण हैं. इसलिए इन पर व्यापक स्तर पर चर्चा और नीति बनाने की जरूरत है.
इस बीच उनकी भूख हड़ताल लगातार जारी है और यह 12वें दिन में प्रवेश कर चुकी है. आंदोलन से जुड़े लोगों के अनुसार, लगातार उपवास की वजह से उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ा है. बताया गया है कि उनका वजन 7 किलोग्राम से अधिक कम हो गया है. डॉक्टर लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे हैं. इसके बावजूद उन्होंने फिलहाल अपना आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है.
सोनम वांगचुक ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और इसमें किसी तरह की हिंसा या अव्यवस्था की कोई जगह नहीं होगी. उन्होंने लोगों से कानून का पालन करते हुए लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने की अपील की है.
20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च को लेकर अब लोगों की नजरें दिल्ली पर टिकी हैं. यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस आंदोलन में कितने लोग शामिल होते हैं और सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है. आने वाले दिनों में यह प्रदर्शन पर्यावरण और जनहित से जुड़े मुद्दों पर राष्ट्रीय स्तर पर नई बहस को भी जन्म दे सकता है.
