टीएनपी डेस्क (TNP DESK): पिछले 26 दिनों से नीट पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर के साथ देश के अलग-अलग राज्यों में हो रहे आंदोलन का दौर थम चुका है. शनिवार की दोपहर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद नए शिक्षा मंत्री ने पदभार संभाल लिया है. पिछले 26-27 दिनों से देश में शिक्षा मंत्री का पद सबसे ज्यादा चर्चा में रहा. लंबे विवाद और आंदोलन के बाद धर्मेंद्र प्रधान की जगह प्रह्लाद जोशी देश के नए शिक्षा मंत्री बन चुके हैं. अब लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर प्रह्लाद जोशी कौन हैं, जिन्हें इतने बड़े आंदोलन के बीच देश के नए शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी दी गई है. आखिर उनकी योग्यता क्या है, उनका जन्म कहां हुआ और उनका राजनीतिक सफर कैसा रहा. आज हम आपको उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत से लेकर केंद्रीय मंत्री बनने तक की पूरी कहानी बताने वाले है.
कौन हैं प्रहलाद जोशी ?
आपको बता दें कि देश के नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी कोई छोटा-मोटा नाम नहीं हैं. उन्होंने जमीनी स्तर से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी. भारतीय राजनीति में उनका नाम ऐसे नेता के तौर पर लिया जाता है, जिन्होंने संगठन से लेकर संसद और केंद्र सरकार तक अपनी अलग पहचान बनाई है. अनुशासन, सादगी और संगठनात्मक क्षमता के लिए पहचाने जाने वाले प्रह्लाद जोशी लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी के सक्रिय नेताओं में शामिल हैं. एक बार फिर उनका नाम चर्चा में है, क्योंकि धर्मेंद्र प्रधान की जगह उन्हें देश के नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री का पद दिया गया है. आपको बता दें कि प्रह्लाद वेंकटेश जोशी का जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के धारवाड़ में एक सामान्य परिवार में हुआ था. बचपन से ही उनकी पढ़ाई में काफी रुचि थी. इसके साथ ही उन्हें सामाजिक कार्यों में भी काफी दिलचस्पी थी. उनकी शुरुआती शिक्षा धारवाड़ में ही हुई. इसके बाद उन्होंने कर्नाटक यूनिवर्सिटी, धारवाड़ से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. छात्र जीवन से ही वे राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रभावित होकर सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे.
पढ़ें आरएसएस से कैसे जुड़ा नाता
कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही उनका जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS से हुआ, जहां वे स्वयंसेवक के रूप में काम करते रहे. इसके बाद वे भारतीय जनता पार्टी से जुड़े और कर्नाटक में पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार काम करने लगे. लंबे समय तक जमीनी स्तर पर काम करने के बाद उन्हें मेहनती और भरोसेमंद नेता के रूप में पहचान मिली. वे हर मुद्दे को मजबूती से उठाने वाले नेता के रूप में जाने जाने लगे.प्रह्लाद जोशी का संसदीय सफर साल 2004 में शुरू हुआ, जब वे पहली बार कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए. इसके बाद उनकी जीत का सिलसिला लगातार जारी रहा. वे लगातार चुनाव जीतते रहे. अपने लोकसभा क्षेत्र में उनकी पकड़ काफी मजबूत रही. यही वजह थी कि वहां की जनता लगातार उन पर भरोसा जताती रही.
साल 2019 में पहली बार बने केंद्रीय मंत्री
सांसद बनने के बाद उन्होंने अपने क्षेत्र और देश से जुड़े कई अहम मुद्दे संसद में उठाए, जिससे उनकी अलग पहचान बनी. पार्टी में भी उनकी छवि एक मजबूत और सक्रिय नेता के रूप में उभरी. इसके बाद भाजपा ने उन्हें संसदीय कार्यों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी. उनकी कार्यशैली को देखते हुए पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी भूमिका निभाने का मौका दिया. साल 2019 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में भाजपा की सरकार बनी, तब प्रह्लाद जोशी को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया. उन्हें कोयला मंत्री, खान मंत्री और संसदीय कार्य मंत्री की जिम्मेदारी मिली. उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कोयला उत्पादन बढ़ाने, खनन क्षेत्र में सुधार और संसद के सुचारु संचालन के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की. उनके नेतृत्व में देश में कोयला उत्पादन बढ़ाने और खनन क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कई नीतिगत फैसले लिए गए.
ईदगाह मैदान में तिरंगा फहराने के बाद देश में हुई चर्चा
इन सबके अलावा प्रह्लाद जोशी का नाम उस समय पूरे देश में चर्चा का विषय बना, जब कर्नाटक के हुबली स्थित ईदगाह मैदान में तिरंगा फहराने का मुद्दा उन्होंने उठाया. लंबे समय से विवादित रहे इस मामले में उन्होंने सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय ध्वज फहराने की मांग का समर्थन किया. उनकी पहल और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ईदगाह मैदान में स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराया गया. यह प्रह्लाद जोशी के राजनीतिक जीवन की बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाता है. भाजपा ने इसे राष्ट्रहित और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया. इस घटना के बाद प्रह्लाद जोशी का नाम पूरे देश में सुर्खियों में आ गया. राजनीतिक जीवन में प्रह्लाद जोशी ऐसे नेता माने जाते हैं, जो विवादों से दूर रहकर संगठन और प्रशासनिक कामकाज पर अधिक ध्यान देते हैं. उनका मानना है कि लोकतंत्र में संवाद और विकास सबसे महत्वपूर्ण हैं. यही वजह है कि भाजपा में उन्हें अनुभवी और भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता है.
प्रहलाद जोशी के सामने नीट पेपर लीक से निपटना बड़ी चुनौती
आपको बता दें कि आज प्रह्लाद जोशी भारतीय राजनीति का एक बड़ा चेहरा है. एक बार फिर केंद्र सरकार ने उन पर भरोसा जताया है और लंबे विवाद के बाद धर्मेंद्र प्रधान की जगह उन्हें शिक्षा मंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है. अब देखने वाली बात होगी कि शिक्षा मंत्री बनने के बाद प्रह्लाद जोशी छात्रों से जुड़े नीट पेपर लीक जैसे बड़े चुनौतीपूर्ण मुद्दे से किस तरह निपटते है.

