टीएनपी डेस्क: दुनिया के अलग-अलग देश में डिग्री से अधिक स्किल बेस्ड पढ़ाई पर फोकस किया जा रहा है. अब नए शिक्षा मंत्री और गठित टास्क फोर्स के लिए यह चुनौती होगी कि इसे कैसे हासिल किया जाए? दरअसल पूरे देश में पढ़ाई के क्षेत्र में बदलाव की मांग उठने लगी है. कॉकरोच जनता पार्टी ने इस मुद्दे को मजबूती से उठाया और दिल्ली के जंतर मंतर पर बड़ा आंदोलन हुआ. यह आंदोलन भी अपने आप में अलग था. लोग जुड़ते गए, भीड़ बढ़ती गई और इसके साथ ही सरकार पर दबाव बढ़ता गया. सरकार को छात्रों की बात माननी पड़ी. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया. उसके बाद सरकार ने घोषणा की है कि एजुकेशन रिफॉर्म के लिए एक हाई पावर टास्क फोर्स बनाई गई है.
टास्क फ़ोर्स की अगुवाई इंफोसिस के फाउंडर नंदन नीलेकणी कर रहे
इस टास्क फाॅर्स की अगुवाई इंफोसिस के फाउंडर नंदन नीलेकणी कर रहे हैं. लेकिन नए शिक्षा मंत्री और टास्क फोर्स की चुनौती छोटी नहीं है. पिछले कुछ वर्षों में तमाम पेपर लीक और बाकी चीजों ने जेन जी के भरोसे को तोड़ा है. ऐसे में टास्क फोर्स और नई शिक्षा मंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती युवा वर्ग का भरोसा जीतना होगा। यह भी चुनौती होगी कि डिग्री बनाम स्किल वाली शिक्षा कैसे स्थापित की जाये। अब दुनिया भर के देशों में डिग्री से अधिक स्किल बेस्ड शिक्षा पर फोकस है. ऐसे में इसके लिए देश भर में माहौल बनाना बड़ी चुनौती होगी। मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी परीक्षाओं में लगभग 20 लाख से अधिक छात्र शामिल होते हैं. ऐसे में इतने बड़े छात्र समूह के लिए एक फूल प्रूफ सिस्टम तैयार करना भी कम बड़ी चुनौती नहीं होगी। यह भी एक काम होगा कि छात्रों के ऊपर से मानसिक दबाव कैसे कम किया जाए? कोटा से लेकर दिल्ली तक, दिल्ली से लेकर पटना तक, करोड़ों के टर्नओवर वाले कोचिंग सेंटर का बोलबाला है. ऐसे में छात्रों पर लगातार प्रेशर होता है और शायद इसी दबाव के कारण हर साल सैकड़ो छात्र आत्महत्या तक कर लेते है.
सिस्टम पर लगाम लगाना भी कम बड़ी चुनौती नहीं होगी
ऐसे में इस सिस्टम पर लगाम लगाना भी कम बड़ी चुनौती नहीं होगी। बोर्ड परीक्षा और कॉपी चेकिंग के लिए भी छात्र फ्रेंडली पोर्टल की जरूरत होगी। दरअसल छात्रों के मन में पेपर लीक को लेकर वर्षों से दबी आवाज़ को जब थोड़ी चिंगारी मिली, तो दिल्ली के जंतर मंतर पर यह ज्वाला बन गई. छात्रों की भीड़ बढ़ने लगी, 20 जुलाई को पुलिस लाठी चार्ज के बाद तो भीड़ अधिक हो गई. सरकार घोषणा करती रह गई कि हम इसमें सुधार कर रहे हैं, लेकिन छात्र मानने को तैयार नहीं थे. छात्र शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अडिग थे. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा के बाद आंदोलन खत्म हुआ. इस आंदोलन ने सरकार पर एक बहुत बड़ा दबाव बना दिया है. सरकार ने उसे आंदोलन के बाद स्पेशल टास्क फोर्स बनाने की घोषणा की है. धर्मेंद्र प्रधान की जगह प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्री का प्रभार दिया गया है. लेकिन नए शिक्षा मंत्री और टास्क फाॅर्स के मुखिया के लिए चुनौतियां से जूझना बहुत आसान नहीं होगा।

