BRICS Summit: 10 साल बाद भारत में साथ दिखेंगे मोदी-पुतिन-जिनपिंग, क्यों खास है ये मुलाकात?
नई दिल्ली में 18वां BRICS Summit शुरू होने जा रहा है. पीएम नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी पर दुनिया की नजर रहेगी. समिट में व्यापार, निवेश, सुरक्षा और भारत-चीन संबंधों समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी.
टिएनपी डेस्क(TNP DESK): नई दिल्ली में शनिवार से 18वां BRICS समिट शुरू होने जा रहा है. इस बार का समिट भारत के लिए कई मायनों में अहम माना जा रहा है. दुनिया के बड़े नेताओं की मौजूदगी के साथ व्यापार, निवेश, सुरक्षा और आपसी सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है.
इस समिट की सबसे खास तस्वीर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की होगी. करीब 10 साल बाद तीनों नेता भारत में आयोजित BRICS समिट में एक साथ दिखाई देंगे. इससे पहले 2016 के गोवा BRICS समिट में तीनों नेता शामिल हुए थे.
BRICS की ताकत कितनी बड़ी है
BRICS अब केवल कुछ बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं का छोटा समूह नहीं रह गया है. इसमें 11 सदस्य देश हैं और समिट में 10 पार्टनर देशों के नेता भी शामिल हो रहे हैं.
BRICS की असली ताकत इसकी आबादी और अर्थव्यवस्था से समझी जा सकती है. सदस्य देशों में दुनिया की करीब 49.5% आबादी रहती है. यानी दुनिया का लगभग हर दूसरा व्यक्ति किसी BRICS देश में रहता है.
PPP यानी क्रय शक्ति के आधार पर देखें तो BRICS देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था दुनिया की करीब 39% है. यही वजह है कि BRICS के फैसलों पर अमेरिका और यूरोप समेत पूरी दुनिया की नजर रहती है.
कई नेताओं से मिलेंगे PM मोदी
समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें करेंगे. इनमें इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद और वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग शामिल हैं.
सबसे ज्यादा चर्चा मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित मुलाकात को लेकर है. दोनों नेताओं की बैठक भारत-चीन संबंधों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण हो सकती है.

7 साल बाद भारत आ रहे जिनपिंग
शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत का दौरा कर रहे हैं. 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत में मोदी और जिनपिंग की यह पहली आमने-सामने की बैठक होगी.
गलवान संघर्ष के बाद लंबे समय तक LAC पर दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण रहे. अब दोनों देश सीमा विवाद से लेकर सैन्य संपर्क और व्यापार तक कई मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ा रहे हैं.
भारत के लिए चीन के साथ व्यापार घाटा भी बड़ी चिंता है. 2025-26 में भारत ने चीन से करीब 11.4 लाख करोड़ रुपए का सामान आयात किया, जबकि व्यापार घाटा 8.6 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा रहा.
भारत-चीन के बीच बढ़ रही कनेक्टिविटी
BRICS समिट के बीच भारत और चीन की कनेक्टिविटी से जुड़ी एक बड़ी खबर भी सामने आई है. चाइना सदर्न एयरलाइंस करीब छह साल बाद भारत के लिए नियमित यात्री उड़ानें दोबारा शुरू करने जा रही है. 21 सितंबर से ग्वांगझू और दिल्ली के बीच फ्लाइट सर्विस शुरू होने की योजना है.
निवेश पर भी फोकस
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने दिल्ली में अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी से मुलाकात की है. इस बातचीत का फोकस भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच कारोबार और निवेश संबंधों को मजबूत करने पर रहा.
कुल मिलाकर इस बार BRICS समिट केवल नेताओं की बैठक तक सीमित नहीं है. भारत के लिए यह कूटनीति, व्यापार, निवेश और चीन के साथ संबंधों को नई दिशा देने का एक बड़ा मौका भी बन सकता है.