MLC vs MLA: कौन ज्यादा पावरफुल? किसे मिलती है ज्यादा सैलरी, और किन राज्यों में है विधान परिषद?

क्या आप जानते हैं कि देश के किन-किन राज्यों में विधान परिषद हैं ?दरअसल देश के 6 राज्यों में विधान परिषद काम करती है. उन राज्यों में उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगना शामिल हैं

MLC vs MLA: कौन ज्यादा पावरफुल? किसे मिलती है ज्यादा सैलरी, और किन राज्यों में है विधान परिषद?

Tnp desk: क्या आप जानते हैं कि देश के किन-किन राज्यों में विधान परिषद हैं ?दरअसल देश के 6 राज्यों में विधान परिषद काम करती है. उन राज्यों में उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगना शामिल हैं. इन राज्यों में विधानसभा के साथ-साथ विधान परिषद भी काम करती है. अभी पूरे देश  विधान परिषद सीटों को लेकर चर्चा चल रही है.2029 के लोकसभा चुनाव से भी परिणाम को जोड़कर देखा जा रहा है. 

इनका चुनाव बैलेट पेपर से होता है. विधान सभा के सदस्य MLA कहलाते हैं तो विधान परिषद के सदस्य MLC कहे जाते हैं. दोनों जनप्रतिनिधि होते हैं. लेकिन उनके चुनाव का तरीका, शक्तियां और कामकाज की भूमिका अलग-अलग होती है. बता दें कि जिस तरह संसद के दो सदन होते हैं, लोकसभा और राज्यसभा, इसी तरह कुछ राज्यों में विधायिका के दो सदन होते हैं. 

 विधानसभा के सदस्य सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं, लेकिन विधान परिषद के सभी सदस्यों का चुनाव सीधे जनता नहीं करती है. कुछ सदस्य स्थानीय निकाय के प्रतिनिधियों, कुछ शिक्षकों और स्नातक  के निर्वाचन क्षेत्र से चुने जाते हैं. कुछ को विधायक चुनते हैं, जबकि कुछ सदस्यों को राज्यपाल मनोनीत करते हैं. विधान परिषद का उद्देश्य राज्य में कानून बनाने की प्रक्रिया में एक अतिरिक्त स्तर पर विचार विमर्श करना होता है. इसमें शिक्षा, साहित्य, विज्ञान, कला, समाज सेवा और उन क्षेत्रों से जुड़े लोगों का प्रतिनिधित्व मिल सकता है. 

एमएलसी कानून बनाने की प्रक्रिया में भाग ले सकते है. सरकार से सवाल पूछ सकते हैं. राज्य के महत्वपूर्ण विषयों पर बहस कर सकते है. लेकिन उनकी शक्तियां MLA जैसी हर मामले में नहीं होती है. एमएलसी मुख्यमंत्री या सरकार में मंत्री बन सकता है. दरअसल ,चर्चा होती रहती है कि एमएलसी को पावर कितना होता है ?उन्हें कितनी सैलरी मिलती है. क्या-क्या सुविधा मिलती है. ऐसे में हो सकता है कि 6 राज्यों में भुगतान की राशि अलग-अलग हो, लेकिन जानकारी के अनुसार उन्हें निर्धारित मासिक सैलरी मिलती है.

 निर्वाचन क्षेत्र में यात्रा, कार्यालय भत्ता, संचार और अन्य निर्धारित कार्यों के लिए भत्ते मिलते है.आवास, चिकित्सा ,यात्रा या ऐसी दूसरी सुविधाएं भी जो नियम के तहत है, उपलब्ध कराई जाती है.  विधान परिषद एक स्थाई सदन होती है. विधानसभा की तरह इसे भंग नहीं किया जा सकता. 

एमएलसी का सामान्य कार्यकाल 6 साल का होता है. उनके चुनाव की तरीके की विशेषता है कि सभी सीटों पर एक ही तरीके से मतदान होता है. विधान परिषद की लगभग एक तिहाई सीटों पर स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि मतदान करते हैं. इनमें नगर निगम, नगर पालिका और जिला स्तर के संबंधित स्थानीय निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं. इन सीटों पर आम जनता सीधे एमएलसी को वोट नहीं देती है. निर्धारित निर्वाचन मंडल के सदस्य मतदान करते हैं.

 स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव होता है. स्नातक निर्वाचन क्षेत्र पर निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले और मतदाता सूची में पंजीकृत स्नातक मतदान करते हैं. सामान्य तौर पर संबंधित व्यक्ति के पास कम से कम 3 साल पहले प्राप्त स्नातक की डिग्री या कानून में निर्धारित समकक्ष योग्यता होनी चाहिए. केवल डिग्री होना पर्याप्त नहीं है. मतदान के रूप में पंजीकरण भी जरूरी है. शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए शैक्षणिक संस्थानों में जरूरी अवधि तक अध्यापन का अनुभव रखने वाले और संबंधित मतदाता सूची में पंजीकृत शिक्षक मतदान करते हैं. यहां भी हर शिक्षक अपने आप मतदाता नहीं बन जाता. उसे संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के नियमों के तहत पात्रता पूरी करनी होती है.