काम की बात : बीमा क्लेम करने जा रहे हैं तो पहले चेक करें ड्राइविंग लाइसेंस, वरना हो सकती है दिक्कत

काम की बात : बीमा क्लेम करने जा रहे हैं तो पहले चेक करें ड्राइविंग लाइसेंस, वरना हो सकती है दिक्कत

टीएनपी डेस्क(TNP DESK):आजकल के जमाने में शायद ही कोई ऐसा होगा जिसके पास आने-जाने के लिए दोपहिया या चारपहिया वाहन न हो. जब लोग बाइक या कार लेकर सड़क पर निकलते हैं, तो वहां हजारों गाड़ियों की भीड़ होती है. ऐसे में कब, कहां और कैसे कोई वाहन आपको टक्कर मार दे या आपकी गाड़ी किसी अन्य वाहन से टकरा जाए, यह कोई नहीं जानता. इससे गाड़ी को काफी ज्यादा नुकसान होता है. किसी भी तरह के नुकसान से बचने के लिए लोग इंश्योरेंस कराते हैं, ताकि सड़क दुर्घटना में यदि आपकी गाड़ी को नुकसान हो जाए तो उसकी भरपाई बीमा के पैसे से हो सके. लेकिन बहुत कम लोग यह सोचते होंगे कि यदि Insurance Claim करने के समय आपका ड्राइविंग लाइसेंस एक्सपायर हो जाए, तो क्या आपका बीमा क्लेम होगा या नहीं होगा.

 बीमा क्लेम से पहले चेक करें ड्राइविंग लाइसेंस

यदि आप भी ऐसे लोगों में शामिल हैं जो इस बारे में नहीं जानते हैं, तो चलिए हम आपको बताते हैं.यदि आपका ड्राइविंग लाइसेंस एक्सपायर हो चुका है और आप बीमा क्लेम करने जा रहे हैं, तो आपको यह खबर जरूर पढ़नी चाहिए. क्योंकि इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा है कि यदि वाहन चालक का लाइसेंस समाप्त हो चुका है और वह वैध नहीं है, तो यह बीमा की शर्तों का उल्लंघन माना जाएगा. ऐसी स्थिति में भले ही बीमा कंपनी तुरंत मुआवजे का भुगतान कर दे, लेकिन बाद में जांच के दौरान यदि यह पता चलता है कि जिस वाहन से दुर्घटना हुई, उसके चालक का ड्राइविंग लाइसेंस एक्सपायर हो चुका था, तो बीमा कंपनी वह रकम वापस ले सकती है.

क्या पीड़ित को मिलेगा मुआवजा 

हालांकि, कोर्ट में जब पीड़ित को मुआवजा मिलने पर सवाल उठाया गया, तो कोर्ट ने कहा कि पीड़ित को मुआवजा जरूर मिलेगा. इसके लिए कोर्ट ने पे एंड रिकवरी सिस्टम को लागू किया है. इसका मतलब यह है कि बीमा कंपनी पहले मुआवजे की राशि पीड़ित या उसके परिवार को देगी, लेकिन बाद में वह रकम वाहन के मालिक और ड्राइवर से वसूल कर सकती है, जिन्होंने बीमा की शर्तों का उल्लंघन किया था. इस व्यवस्था के पीछे उद्देश्य एक ही है कि बीमा कंपनी और वाहन मालिक के बीच विवाद की वजह से पीड़ित परिवार को मुआवजे के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े.

बीमा कंपनी मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला साल 2009 में पंजाब में हुई एक सड़क दुर्घटना से जुड़े मामले में सुनाया था. इस मामले में एक वाहन ने दोपहिया वाहन को टक्कर मार दी थी. मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा था कि दुर्घटना के समय वाहन चालक का लाइसेंस पहले ही काफी समय से एक्सपायर हो चुका और बाद में उसे दोबारा रिन्यू कराया se गया. ऐसे में बीमा कंपनी मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार नहीं है. हालांकि, बाद में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इस फैसले को बदलते हुए बीमा कंपनी को 1.08 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा देने का आदेश दिया था.