30 की उम्र में क्यों आ रहा 40 का बुढ़ापा? 'नेचर मेडिसिन' की स्टडी ने युवाओं में बढ़ते कैंसर पर किया बड़ा खुलासा

30 की उम्र में क्यों आ रहा 40 का बुढ़ापा? 'नेचर मेडिसिन' की स्टडी ने युवाओं में बढ़ते कैंसर पर किया बड़ा खुलासा

टीनपी डेस्क (TNP DESK): आज का युवा भले ही कैलेंडर और दस्तावेजों के हिसाब से 30 साल का हो, लेकिन अंदरूनी तौर पर उसका शरीर 40 या 45 साल के बुजुर्ग जैसा व्यवहार कर रहा है. चिकित्सा विज्ञान की दुनिया में इसे 'एक्सेलेरेटेड एजिंग' यानी समय से पहले बुढ़ापा आना कहा जा रहा है. वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन द्वारा किया गया एक नवीनतम शोध प्रतिष्ठित पत्रिका 'नेचर मेडिसिन' में प्रकाशित हुआ है, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है. इस अध्ययन ने साफ किया है कि आज की युवा पीढ़ी पिछली पीढ़ियों के मुकाबले जैविक रूप से कहीं अधिक तेजी से बूढ़ी हो रही है, और यही तेजी से बढ़ता बुढ़ापा युवाओं में 'अर्ली-ऑनसेट कैंसर' (55 वर्ष या उससे कम उम्र में होने वाला कैंसर) का सबसे बड़ा कारण बनता जा रहा है.

वास्तविक उम्र बनाम जैविक उम्र का अंतर

इस खतरे को गहराई से समझने के लिए वैज्ञानिकों ने 'क्रोनोलॉजिकल एज' (वास्तविक उम्र) और 'बायोलॉजिकल एज' (जैविक उम्र) के अंतर को आधार बनाया है. क्रोनोलॉजिकल उम्र वह होती है जिसे हम अपने जन्मदिन से गिनते हैं यानी जन्म के बाद से बीते हुए वर्ष. इसके विपरीत, बायोलॉजिकल उम्र यह दर्शाती है कि आपके शरीर के आंतरिक अंग, कोशिकाएं और आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता वास्तव में कितनी स्वस्थ और कार्यक्षम हैं.

खराब जीवनशैली और मानसिक तनाव के कारण आज के युवाओं की जैविक उम्र उनकी वास्तविक उम्र से काफी आगे निकल चुकी है, जिससे उनका शरीर उन गंभीर बीमारियों की चपेट में आने लगा है जो आमतौर पर बुढ़ापे में होती थीं.

1.6 लाख से अधिक लोगों के डेटा का विश्लेषण

वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए दो बेहद विशालकाय वैश्विक डेटासेट का गहन विश्लेषण किया. इस अध्ययन में यूनाइटेड किंगडम (UK) के 1,54,000 से अधिक और संयुक्त राज्य अमेरिका (US) के 10,000 से अधिक नागरिकों का संपूर्ण स्वास्थ्य डेटा शामिल किया गया था. वैज्ञानिकों ने इन लोगों के रक्त (ब्लड) में मौजूद उन विशिष्ट बायोमार्कर की जांच की जो सीधे तौर पर मानव मेटाबॉलिज्म, लिवर-किडनी जैसे मुख्य अंगों की कार्यक्षमता और शरीर में उम्र बढ़ने के स्तर को ट्रैक करते हैं. नतीजों में देखा गया कि जिन लोगों की जैविक उम्र तेजी से बढ़ रही थी, उनमें शुरुआती चरण के ठोस ट्यूमर (कैंसर) का जोखिम लगभग 15 प्रतिशत अधिक पाया गया.

विशिष्ट अंगों का बुढ़ापा और कैंसर का सीधा संबंध

इस शोध की सबसे महत्वपूर्ण खोज यह रही कि शरीर के किसी खास हिस्से का समय से पहले बूढ़ा होना, किसी खास प्रकार के कैंसर को दावत दे रहा है. वैज्ञानिकों ने इसके दो स्पष्ट उदाहरण पेश किए हैं:

  • इम्यून सिस्टम का बुढ़ापा: जिन युवाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) अपनी तय उम्र से ज्यादा बूढ़ी और शिथिल हो चुकी थी, उनमें फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer) का खतरा बेहद उच्च स्तर पर देखा गया.
  • वसा ऊतकों का बुढ़ापा: जिन व्यक्तियों की वसा ऊतक प्रणाली (फैटी टीश्यू सिस्टम) तेजी से उम्रदराज हो रही थी, उनमें कोलोरेक्टल कैंसर (आंतों का कैंसर) होने की संभावना बहुत ज्यादा पाई गई.

क्यों तेजी से बूढ़ी हो रही है नई पीढ़ी?

वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके पीछे आधुनिक जीवनशैली के कई गंभीर कारण मिलकर काम कर रहे हैं:

  • मेटाबॉलिक गड़बड़ियां: युवाओं में बढ़ता मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस और फैटी लिवर जैसी समस्याएं कोशिकाओं को समय से पहले बूढ़ा कर रही हैं.
  • दूषित खान-पान: अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड, रिफाइंड शुगर और जंक फूड का सेवन शरीर में लगातार अंदरूनी सूजन (इंफ्लेमेशन) पैदा करता है.
  • शारीरिक निष्क्रियता: घंटों तक एक जगह बैठकर काम करना और व्यायाम की कमी शरीर को निष्क्रिय बना देती है.
  • तनाव और अधूरी नींद: क्रोनिक स्ट्रेस और पर्याप्त नींद न मिलना शरीर की प्राकृतिक रिपेयरिंग (कोशिकाओं के नवीनीकरण) की प्रक्रिया को रोक देता है.

यह अध्ययन स्पष्ट चेतावनी देता है कि यदि युवाओं ने समय रहते अपनी बायोलॉजिकल एज यानी आंतरिक स्वास्थ्य को नियंत्रित नहीं किया, तो आने वाले समय में कैंसर जैसी घातक बीमारियों का खतरा और अधिक भयावह रूप ले सकता है.