चाय की टपरी से सियासत के गलियारों तक पहुंची ‘हेलो! हम बोल रहे हैं’, ग्रामीण जिंदगी से जुड़ने की है कोशिश

बिहार की मिट्टी, गांव की गलियां, चाय की टपरी पर दोस्तों की गपशप और अचानक जिंदगी में आ जाने वाला एक अनजान फोन कॉल. इन्हीं छोटी-छोटी बातों से शुरू होती है वेब सीरीज ‘हेलो! हम बोल रहे हैं’ की कहानी. Waves OTT पर रिलीज हुई आठ एपिसोड की यह सीरीज अपराध और बाहुबल की पुरानी कहानियों से हटकर आम लोगों की जिंदगी और राजनीति के रिश्ते को दिखाती है

चाय की टपरी से सियासत के गलियारों तक पहुंची ‘हेलो! हम बोल रहे हैं’, ग्रामीण जिंदगी से जुड़ने की है कोशिश

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): बिहार की मिट्टी, गांव की गलियां, चाय की टपरी पर दोस्तों की गपशप और अचानक जिंदगी में आ जाने वाला एक अनजान फोन कॉल. इन्हीं छोटी-छोटी बातों से शुरू होती है वेब सीरीज ‘हेलो! हम बोल रहे हैं’ की कहानी. Waves OTT पर रिलीज हुई आठ एपिसोड की यह सीरीज अपराध और बाहुबल की पुरानी कहानियों से हटकर आम लोगों की जिंदगी और राजनीति के रिश्ते को दिखाती है. बुधवार को अभिनेता निलय मिताश और फिल्म निर्माता राज शेखर ने प्रेस क्लब में मीडिया से बातचीत के दौरान सीरीज से जुड़ी कई बातें साझा कीं.

गांव की जिंदगी और लोगों से जुड़ने की कोशिश

THE NEWS POST की टीम से बात करते हुए अभिनेता निलय मिताश ने बताया कि इस सीरीज को बनाने के पीछे उनकी कोशिश ग्रामीण जिंदगी को करीब से दिखाने और कहानी के जरिए लोगों से जुड़ने की है. उन्होंने कहा कि गांव की जिंदगी में कई ऐसी छोटी-छोटी बातें होती हैं, जिनसे हर कोई खुद को जोड़ सकता है. वहां की बातचीत, रिश्ते, दोस्ती, प्यार और लोगों के सोचने का तरीका कहानी को खास बनाता है. उन्होंने बताया कि सीरीज में संवादों को भी इस तरह रखने की कोशिश की गई है कि वे बनावटी न लगें, बल्कि ऐसा महसूस हो जैसे लोग अपने आसपास रोजमर्रा की जिंदगी में बात करते हैं. किरदारों की भाषा, उनके बोलने का अंदाज और उनके फैसलों के पीछे की सोच को कहानी का हिस्सा बनाया गया है, ताकि दर्शकों को लगे कि वे किसी फिल्मी दुनिया के बजाय अपने आसपास के लोगों की कहानी देख रहे हैं.

गानों और संवादों में भी दिखती है गांव की झलक

निलय ने बताया  की सीरीज के गाने और डाइअलॉग्‌ तैयार करते समय भी ग्रामीण परिवेश को ध्यान में रखा गया है. गानों को केवल मनोरंजन के लिए रखने के बजाय कहानी के माहौल और किरदारों की भावनाओं से जोड़ने की कोशिश की गई है. ‘मीठी बोलियां’ गीत में भी इसी सादगी और अपनापन महसूस होता है. डाइअलॉग्‌ को लेकर भी काफी सोच-विचार किया गया है, ताकि उनकी भाषा और भाव दर्शकों तक आसानी से पहुंच सकें. कोशिश रही है कि बातचीत में गांव की असलियत बनी रहे और किरदारों की बातें सीधे लोगों के दिल तक पहुंचें.

एक फोन कॉल बदल देता है पप्पू की जिंदगी

सीरीज की कहानी बिहार के काल्पनिक गांव पीपरहिया के रहने वाले पप्पू के इर्द-गिर्द घूमती है. वह अपने दोस्तों पवन और पिंटू के साथ सामान्य जिंदगी जी रहा होता है. लेकिन प्यार की तलाश में किया गया एक फोन कॉल उसे ऐसे घटनाक्रम में उलझा देता है, जहां दोस्ती, रिश्ते और राजनीति एक-दूसरे से जुड़ने लगते हैं.

कहानी आगे बढ़ने के साथ चुनावी राजनीति, नेताओं की रणनीति और मीडिया की भूमिका भी सामने आती है. इसमें दिखाया गया है कि किस तरह एक आम इंसान की जिंदगी बड़े राजनीतिक समीकरणों से प्रभावित हो सकती है.

कलाकारों के अभिनय ने बनाया कहानी को खास

सीरीज में निलय मिताश के साथ प्रतिभा तिवारी, इश्तियाक खान, यशपाल शर्मा, सुष्मिता मुखर्जी, पंकज बेरी और दयाशंकर पांडेय जैसे कलाकार नजर आते हैं. कलाकारों के सहज अभिनय और स्थानीय माहौल को कहानी में जगह देने की कोशिश इसे अलग पहचान देती है. हालांकि, कुछ हिस्सों में कहानी की रफ्तार धीमी पड़ती है, लेकिन ग्रामीण जिंदगी, रिश्तों और राजनीति को एक साथ समझने की कोशिश सीरीज को देखने लायक बनाती है.