'आवारा' से 'बॉबी' तक: कैसे राज कपूर बने हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े शोमैन

'आवारा' से 'बॉबी' तक: कैसे राज कपूर बने हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े शोमैन

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): जब भी भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर की बात होती है, तो एक नाम अपने आप सामने आ जाता है और वो है राज कपूर. एक ऐसा कलाकार जिसने सिर्फ फिल्मों में अभिनय ही नहीं किया, बल्कि अपने सपनों और सोच से हिंदी सिनेमा को एक नई पहचान दी. उन्हें प्यार से "शोमैन ऑफ इंडियन सिनेमा" कहा जाता है.

राज कपूर की फिल्मों में सिर्फ गाने और मनोरंजन नहीं होता था, बल्कि आम आदमी की जिंदगी, उसके संघर्ष, सपने और समाज की सच्चाई भी दिखाई देती थी. यही वजह रही कि उनका जादू सिर्फ भारत में नहीं, बल्कि विदेशों तक देखने को मिला.

असली नाम और फिल्मी सफर की शुरुआत

राज कपूर का जन्म 14 दिसंबर 1924 को पेशावर में हुआ था, जो उस समय ब्रिटिश भारत का हिस्सा था और अब पाकिस्तान में है. उनका पूरा नाम रणबीर राज कपूर था. वह मशहूर अभिनेता पृथ्वीराज कपूर के बेटे थे.

फिल्मों का माहौल उन्हें बचपन से ही मिला. सिर्फ 10 साल की उम्र में उन्होंने फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था. धीरे-धीरे उन्होंने अभिनय के साथ-साथ फिल्म निर्माण और निर्देशन में भी अपनी पहचान बना ली.

कपूर खानदान की विरासत को नई ऊंचाई दी

राज कपूर ने साल 1948 में अपना फिल्म स्टूडियो आरके फिल्म्स शुरू किया. यह सिर्फ एक प्रोडक्शन हाउस नहीं था, बल्कि भारतीय सिनेमा में नए प्रयोगों की शुरुआत थी.

उन्होंने अपने पिता पृथ्वीराज कपूर की विरासत को आगे बढ़ाया और कपूर परिवार को फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े नामों में शामिल कर दिया. उनकी फिल्मों में समाज की परेशानियों और इंसानी भावनाओं को बहुत खूबसूरती से दिखाया जाता था.

'आवारा' से लेकर 'श्री 420' तक, हर फिल्म बनी यादगार

राज कपूर की कई फिल्में आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई हैं. साल 1951 में आई "आवारा" ने उन्हें दुनियाभर में पहचान दिलाई. इस फिल्म में उनका भोला-भाला लेकिन संघर्ष करने वाला किरदार लोगों को बहुत पसंद आया.

इसके बाद "श्री 420", "चोरी-चोरी", "जागते रहो", "जिस देश में गंगा बहती है", "संगम", "मेरा नाम जोकर" और "बॉबी" जैसी फिल्मों ने उन्हें हिंदी सिनेमा का बड़ा नाम बना दिया.

हर फिल्म हिट नहीं रही, कुछ फिल्मों को मिली निराशा

राज कपूर के करियर में कई बड़ी हिट फिल्में रहीं, लेकिन कुछ फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा.

साल 1970 में रिलीज हुई "मेरा नाम जोकर" शुरुआत में दर्शकों को ज्यादा पसंद नहीं आई और कमाई के मामले में उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई. हालांकि बाद में इस फिल्म को लोगों ने काफी सराहा और यह हिंदी सिनेमा की यादगार फिल्मों में शामिल हो गई.

अवार्ड और सम्मान की लंबी लिस्ट

राज कपूर को भारतीय सिनेमा में उनके शानदार योगदान के लिए कई बड़े सम्मान मिले. उन्हें भारत सरकार की ओर से पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. इसके अलावा उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सम्मान दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से भी नवाजा गया.

उनकी फिल्मों को भी कई पुरस्कार मिले. फिल्म "बूट पॉलिश" को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था. इसके अलावा उनकी कई फिल्मों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई.

विदेशों में भी था राज कपूर का जबरदस्त क्रेज

राज कपूर की लोकप्रियता सिर्फ भारत तक सीमित नहीं थी. रूस, चीन और कई दूसरे देशों में उनके लाखों प्रशंसक थे.

रूस में उनकी फिल्म "आवारा" इतनी पसंद की गई कि वहां लोग उन्हें एक बड़े विदेशी सितारे की तरह पहचानने लगे. उनकी फिल्मों के गाने और किरदार आज भी कई देशों में लोकप्रिय हैं.

बड़े स्तर पर शूटिंग करने का था अलग अंदाज

राज कपूर अपनी फिल्मों को बड़े पैमाने पर बनाने के लिए जाने जाते थे. उनकी फिल्म "संगम" की शूटिंग भारत के अलावा यूरोप की खूबसूरत जगहों पर भी की गई थी. उन्होंने भारतीय फिल्मों को सिर्फ देश तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेश करने की कोशिश की.

राज कपूर की विरासत आज भी जिंदा है

राज कपूर सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि एक पूरा दौर थे. उन्होंने भारतीय सिनेमा को नई सोच दी और कपूर खानदान की विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया.

आज भी उनकी फिल्में देखी जाती हैं, उनके किरदार याद किए जाते हैं और उनका काम नए कलाकारों के लिए प्रेरणा बना हुआ है. राज कपूर हमेशा उस कलाकार के रूप में याद किए जाएंगे, जिन्होंने भारतीय सिनेमा को दुनिया के सामने एक नई पहचान दिलाई.