TNP DESK: देशभर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी पेपर लीक मामले की जांच अब अहम दौर में पहुंच गई है. केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 आरोपियों के खिलाफ विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है. अब उम्मीद की जा रही है कि अदालत जल्द ही इस आरोपपत्र पर संज्ञान लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू करेगी. हालांकि, जांच एजेंसी ने साफ किया है कि मामले की जांच अभी समाप्त नहीं हुई है और कुछ अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल जारी है.
नीट-यूजी पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठे थे. सीबीआई का कहना है कि जांच के दौरान कई ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनके आधार पर आरोपियों के खिलाफ मजबूत मामला तैयार किया गया है. एजेंसी ने यह भी संकेत दिया है कि यदि आगे जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो अतिरिक्त चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती है.
सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपपत्र दाखिल किया है. जांच एजेंसी के अनुसार, सभी आरोपियों की भूमिका अलग-अलग स्तर पर सामने आई है और उपलब्ध सबूतों के आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है. फिलहाल सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं.
चार्जशीट में जिन 13 लोगों को आरोपी बनाया गया है, उनमें यश यादव, मंगीलाल बीवाल, दिनेश बीवाल, विकास बीवाल, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे, प्रह्लाद कुलकर्णी, तेजस हर्षद कुमार, डॉ. मनोज शिरुरे, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, मनीषा वाघमारे, मनीषा मंडहरे और मनीषा संजय हवलदार शामिल हैं. सीबीआई का कहना है कि सभी आरोपियों की भूमिका की जांच के बाद ही उन्हें आरोपपत्र में शामिल किया गया है.
जांच के दौरान सबसे अहम सबूत मंगीलाल बीवाल के मोबाइल फोन से मिला. सीबीआई के अनुसार, उसके मोबाइल में नीट-यूजी का लीक हुआ प्रश्नपत्र मिला, जिससे पूरे मामले की कई अहम कड़ियां जुड़ गईं. जांच में यह भी सामने आया कि मंगीलाल अपने बेटे विकास बीवाल को परीक्षा में फायदा दिलाना चाहता था. इसी उद्देश्य से उसने कथित तौर पर शुभम खैरनार के संपर्क में आकर प्रश्नपत्र हासिल करने की योजना बनाई.
सीबीआई के मुताबिक, मंगीलाल बीवाल ने यश यादव से 10 लाख रुपये देकर प्रश्नपत्र खरीदा था. पूछताछ में विकास बीवाल ने बताया कि उसकी मुलाकात यश यादव से राजस्थान के सीकर स्थित एक कोचिंग संस्थान में हुई थी. इसी संपर्क के जरिए कथित तौर पर पेपर लीक की पूरी साजिश को अंजाम दिया गया. एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश कर रही है.
जांच एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के कुछ अधिकारियों की संभावित भूमिका की जांच अभी जारी है. यदि जांच में उनकी संलिप्तता के प्रमाण मिलते हैं, तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. जरूरत पड़ने पर सीबीआई पूरक चार्जशीट भी दाखिल करेगी.
इस मामले की शुरुआत 12 मई को एक सरकारी अधिकारी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से हुई थी. इसके बाद एफआईआर दर्ज हुई और जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को सौंप दी गई. डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल फोन के डेटा, पूछताछ और तकनीकी जांच के आधार पर एजेंसी ने आरोपियों के खिलाफ सबूत जुटाए. अब चार्जशीट दाखिल होने के बाद इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई अदालत में आगे बढ़ेगी और आने वाले समय में इससे जुड़े नए खुलासे भी सामने आ सकते हैं.

