Toddlers के एडमिशन की होड़ में कहीं पीछे न रह जाए आपका बच्चा, इन आसान तरीकों से करा सकते हैं दाखिले की तैयारी
बच्चों के बेहतर भविष्य की शुरुआत अच्छी शिक्षा से होती है. यही वजह है कि आजकल माता-पिता अपने बच्चों को कम उम्र से ही अच्छे स्कूलों में दाखिला दिलाने की तैयारी में जुट जाते हैं. खासकर टॉडलर्स यानी छोटे बच्चों के एडमिशन को लेकर अभिभावकों के बीच काफी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है.
टीएनपी डेस्क (TNP DESK): बच्चों के बेहतर भविष्य की शुरुआत अच्छी शिक्षा से होती है. यही वजह है कि आजकल माता-पिता अपने बच्चों को कम उम्र से ही अच्छे स्कूलों में दाखिला दिलाने की तैयारी में जुट जाते हैं. खासकर टॉडलर्स यानी छोटे बच्चों के एडमिशन को लेकर अभिभावकों के बीच काफी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है. कई प्रतिष्ठित स्कूलों में सीमित सीटें होने के कारण एडमिशन की प्रक्रिया आसान नहीं होती. ऐसे में अगर आप भी अपने बच्चे का दाखिला किसी अच्छे स्कूल में कराना चाहते हैं, तो समय रहते कुछ जरूरी तैयारियां करना आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.
बच्चे के एडमिशन की तैयारी का पहला कदम सही स्कूल का चयन करना है. स्कूल का शैक्षणिक माहौल, शिक्षकों का व्यवहार, बच्चों की सुरक्षा, साफ-सफाई, खेलकूद की सुविधाएं और पढ़ाई का तरीका जैसे पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है. केवल स्कूल की लोकप्रियता या नाम देखकर फैसला न लें, बल्कि यह भी समझें कि वहां का माहौल आपके बच्चे के लिए कितना अनुकूल है. एडमिशन की तारीख, आवेदन प्रक्रिया और उपलब्ध सीटों की जानकारी पहले ही हासिल कर लें.
अलग-अलग स्कूलों में नर्सरी, प्लेग्रुप और अन्य शुरुआती कक्षाओं में दाखिले के लिए उम्र से जुड़े नियम अलग हो सकते हैं. इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित स्कूल की आयु सीमा और एडमिशन संबंधी दिशा-निर्देश जरूर जांच लें. बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट साइज फोटो, माता-पिता के पहचान पत्र और पते से जुड़े दस्तावेज तैयार रखें. कई स्कूल अतिरिक्त दस्तावेज भी मांग सकते हैं. आवेदन फॉर्म भरते समय सभी जानकारियां सही दर्ज करें, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो.
टॉडलर्स के लिए स्कूल जाना एक नया अनुभव होता है. ऐसे में बच्चे को अचानक लंबे समय तक घर से दूर रखने के बजाय धीरे-धीरे स्कूल जैसी दिनचर्या की आदत डालें. घर पर उसके खेलने, खाने, सोने और उठने का एक नियमित समय तय करें. बच्चे को दूसरे बच्चों के साथ खेलने और घुलने-मिलने के अवसर दें. इससे उसमें सामाजिक व्यवहार और आत्मविश्वास विकसित करने में मदद मिल सकती है.
छोटे बच्चों पर पढ़ाई का दबाव डालना सही नहीं है. इस उम्र में सीखने का सबसे अच्छा तरीका खेल, बातचीत, कहानियां और गतिविधियां हैं. माता-पिता बच्चे को रंगों, आकारों, जानवरों, फलों और रोजमर्रा की चीजों के नाम सिखा सकते हैं. चित्रों वाली किताबें पढ़ना, कविताएं सुनना और छोटी-छोटी कहानियां सुनाना भी उपयोगी हो सकता है. बच्चे को अपनी जरूरत बताने, अपना नाम पहचानने और सरल निर्देश समझने का अभ्यास कराएं. हालांकि, हर बच्चे की सीखने की गति अलग होती है, इसलिए दूसरे बच्चों से उसकी तुलना करने से बचें.
कुछ स्कूल दाखिले के दौरान बच्चे और अभिभावकों के साथ बातचीत या इंटरैक्शन करते हैं. ऐसे में बच्चे को सहज तरीके से अपना नाम बताने, परिचित चीजों को पहचानने और सामान्य सवालों का जवाब देने का अभ्यास कराया जा सकता है. लेकिन उसे रटाने या जवाब देने के लिए मजबूर करने से बचें. स्कूल का उद्देश्य और प्रक्रिया अलग-अलग हो सकती है, इसलिए संबंधित संस्थान के निर्देशों को समझना जरूरी है.