APAAR ID को लेकर हैं कन्फ्यूज़न ? जानिए बच्चे कैसे बनवा सकते हैं यह कार्ड और क्या हैं इसके फायदे

APAAR ID को लेकर हैं कन्फ्यूज़न ? जानिए बच्चे कैसे बनवा सकते हैं यह कार्ड और क्या हैं इसके फायदे

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): देशभर में छात्रों की डिजिटल पहचान के लिए शुरू की गई APAAR ID (Automated Permanent Academic Account Registry) एक बार फिर चर्चा में है. सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि APAAR ID पूरी तरह स्वैच्छिक (Optional) है और किसी भी छात्र की आईडी उसके माता-पिता या अभिभावक की स्पष्ट सहमति के बिना नहीं बनाई जा सकती. अदालत ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को निर्देश दिया है कि APAAR ID के सहमति (Consent) फॉर्म में यह स्पष्ट विकल्प जोड़ा जाए कि यदि अभिभावक चाहें तो वे APAAR ID बनवाने से इनकार भी कर सकते हैं.

यह मामला ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित एक निजी स्कूल से जुड़ा है, जहां अभिभावकों से APAAR ID के लिए सहमति मांगी गई थी. आरोप था कि दिए गए सहमति पत्र में "सहमति नहीं" देने का कोई विकल्प मौजूद नहीं था. इसे चुनौती देते हुए अभिभावक रोहित आनंद दास ने ओडिशा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. हाईकोर्ट ने 2025 में कहा था कि यदि योजना स्वैच्छिक है तो अभिभावकों को शुरुआत में ही मना करने का विकल्प भी मिलना चाहिए. अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी आदेश को लागू करने का निर्देश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल बाद में सहमति वापस लेने का विकल्प पर्याप्त नहीं माना जा सकता. यदि कोई अभिभावक शुरुआत से ही APAAR ID नहीं बनवाना चाहता है तो उसे इसका अधिकार मिलना चाहिए. अदालत की टिप्पणी के बाद यह भी साफ हो गया है कि APAAR ID नहीं बनवाने वाले छात्रों को प्रवेश, परीक्षा, मार्कशीट, प्रमाणपत्र या किसी अन्य शैक्षणिक सुविधा से वंचित नहीं किया जा सकता.

आखिर क्या है APAAR ID?
APAAR ID यानी Automated Permanent Academic Account Registry भारत सरकार की 'वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी' पहल का हिस्सा है. यह प्रत्येक छात्र के लिए जारी की जाने वाली 12 अंकों की स्थायी डिजिटल पहचान है. इसका उद्देश्य छात्र की पूरी शैक्षणिक यात्रा का डिजिटल रिकॉर्ड एक ही प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखना है. इस आईडी में छात्र की मार्कशीट, प्रमाणपत्र, डिग्री, छात्रवृत्ति, पुरस्कार, क्रेडिट और अन्य शैक्षणिक उपलब्धियां डिजिटल रूप से सुरक्षित रहती हैं. यह DigiLocker और Academic Bank of Credits (ABC) से भी जुड़ी होती है.

कैसे बनती है APAAR ID?
कक्षा 1 से 12वीं तक पढ़ने वाले छात्रों की APAAR ID स्कूल के माध्यम से बनाई जाती है. इसके लिए पहले स्कूल अभिभावकों को सहमति पत्र देता है. माता-पिता की स्वीकृति मिलने के बाद छात्र और अभिभावक के आधार कार्ड की मदद से आवेदन किया जाता है. तैयार होने के बाद APAAR ID DigiLocker में उपलब्ध हो जाती है. 12वीं के बाद छात्र स्वयं भी DigiLocker या संबंधित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से APAAR ID के लिए आवेदन कर सकते हैं. APAAR ID बनवाने के लिए छात्र का आधार कार्ड, DigiLocker अकाउंट और अभिभावक की सहमति आवश्यक होती है. नाबालिग छात्रों के लिए बिना माता-पिता की अनुमति के यह प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकती.

याचिकाकर्ताओं और कुछ विशेषज्ञों ने APAAR ID को लेकर डेटा सुरक्षा और निजता (Privacy) पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि यदि बड़ी मात्रा में छात्रों का व्यक्तिगत डेटा एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संग्रहित होगा तो डेटा लीक या दुरुपयोग का खतरा बढ़ सकता है. कुछ अभिभावकों को यह आशंका भी थी कि भविष्य में APAAR ID को अनिवार्य बना दिया गया तो जिन छात्रों के पास यह आईडी नहीं होगी, उन्हें शैक्षणिक सुविधाओं में परेशानी हो सकती है.

केंद्र सरकार और CBSE ने अदालत में स्पष्ट किया कि APAAR ID पूरी तरह स्वैच्छिक है. अभिभावक चाहें तो सहमति न दें या बाद में अपनी सहमति वापस भी ले सकते हैं. सरकार का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य केवल छात्रों का शैक्षणिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखना और शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और सुविधाजनक बनाना है. सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणी के बाद अब यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सहमति फॉर्म में अभिभावकों को स्पष्ट रूप से "हाँ" और "नहीं" दोनों विकल्प उपलब्ध हों.