NEET पर सख्त पहरा! Telegram पर लगी रोक, जानिए आखिर इस ऐप से परीक्षा को क्यों है खतरा?

NEET पर सख्त पहरा! Telegram पर लगी रोक, जानिए आखिर इस ऐप से परीक्षा को क्यों है खतरा?

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले के बाद अब दोबारा से परीक्षा कराई जा रही है और ऐसे में दोबारा परीक्षा से पहले केंद्र सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसकी चर्चा सिर्फ छात्रों के बीच ही नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी की दुनिया में भी खूब हो रही है. करोड़ों लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सोशल मीडिया मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram पर भारत में अस्थायी रूप से रोक लगा दी गई है. सरकार का कहना है कि यह कदम परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने और पेपर लीक का खतरा और उससे जुड़ी अफवाहों व साइबर ठगी पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर Telegram क्या है, यह कैसे काम करता है और NEET जैसी बड़ी परीक्षा के लिए इसे खतरा क्यों माना जा रहा है?

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 69A के तहत Telegram पर 22 जून 2026 तक अस्थायी प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है. इसके अलावा Telegram के मैसेज एडिट फीचर को भी 30 जून तक बंद रखने का निर्देश दिया गया है, ताकि पहले से भेजे गए संदेशों में बाद में बदलाव न किया जा सके.

आखिर Telegram है क्या?

Telegram एक क्लाउड-आधारित मैसेजिंग प्लेटफॉर्म है, जिसकी शुरुआत 2013 में हुई थी. यह WhatsApp की तरह चैट, कॉल, फोटो और वीडियो शेयर करने की सुविधा देता है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत बड़े ग्रुप और चैनल हैं. Telegram पर लाखों लोगों को एक साथ जोड़ा जा सकता है. यही वजह है कि इसका इस्तेमाल पढ़ाई, बिजनेस, न्यूज अपडेट और कम्युनिटी नेटवर्किंग के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है. साथ ही पेपर लीक जैसी घटनाओं को भी Telegram पर ही ज्यादातर अंजाम दिया जाता है. Telegram ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां मास समूह को जोड़ा जा सकता है और यह डार्क वेब के जरिए भी सक्रिय रह सकता है. 

NEET परीक्षा के लिए खतरा क्यों बना Telegram?

NTA के अनुसार पिछले कुछ सप्ताह में Telegram पर "PAPER LEAKED NEET", "Re-NEET 2026" और "NEET MAFIA" जैसे नामों से कई चैनल और ग्रुप सक्रिय थे. इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए छात्रों और उनके परिजनों को गुमराह किया जा रहा था. कुछ मामलों में कथित तौर पर पेपर उपलब्ध कराने के नाम पर लाखों रुपये की मांग भी की गई. एजेंसी का कहना है कि Telegram का मैसेज एडिट फीचर इस समस्या को और गंभीर बना देता है. आरोप है कि कुछ लोग परीक्षा खत्म होने के बाद वास्तविक प्रश्नपत्र को पुराने संदेशों में जोड़कर यह दिखाने की कोशिश करते थे कि पेपर पहले ही लीक हो चुका था. इससे भ्रम फैलता था और परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते थे.

इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने कई Telegram चैनलों, ग्रुप्स और बॉट्स को हटवाया है. वहीं बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई और अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने भी ऐसे गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई की है, जो छात्रों को फर्जी पेपर और परीक्षा में मदद के नाम पर ठगने का काम कर रहे थे. अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच की जांच में एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का खुलासा हुआ, जिसने फर्जी बैंक खातों के जरिए करीब 1.5 करोड़ रुपये का लेनदेन किया. जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ने एक महीने के भीतर लगभग एक हजार मोबाइल नंबरों से संपर्क किया था.

हालांकि Telegram पर लगी अस्थायी रोक का असर सिर्फ छात्रों पर नहीं पड़ेगा. लाखों लोग इसका इस्तेमाल पढ़ाई की सामग्री, नौकरी से जुड़ी जानकारी, बड़े दस्तावेज साझा करने और कम्युनिटी ग्रुप चलाने के लिए करते हैं. प्रतिबंध के दौरान उन्हें वैकल्पिक प्लेटफॉर्म जैसे Google Drive, WhatsApp या अन्य सेवाओं का सहारा लेना पड़ सकता है.

21 जून को होने वाली NEET-UG री-एग्जाम को सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने कड़े इंतजाम किए हैं. भारतीय वायुसेना पिछले चार दिनों में 200 से अधिक उड़ानें भरकर 20 से ज्यादा स्थानों तक प्रश्नपत्र पहुंचा रही है. प्रश्नपत्रों को GPS ट्रैकिंग और डिजिटल लॉक से लैस विशेष बॉक्स में रखा गया है. किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ होने पर दिल्ली स्थित कंट्रोल रूम में तुरंत अलर्ट पहुंच जाएगा.