NEET में कम रैंकिंग के बाद भी एडमिशन नहीं बनेगी प्रॉब्लम, जानिए टॉप मेडिकल कॉलेज के बारे में जहां आसानी से मिलेगा दाखिला

अगर आप भी NEET aspirant हैं और NEET परीक्षा की तैयारी के लिए दिन रात मेहनत कर रहे हैं, फिरभी आपके मन में यह सवाल हमेशा है कि अगर परीक्षा में आपका रैंक, टॉप स्कोरर में नहीं आया तो आपके लिए बेहतरीन कॉलेज के दरवाजे बंद हो जाएंगे, तो याह खबर आपके बड़े काम की है.

NEET में कम रैंकिंग के बाद भी एडमिशन नहीं बनेगी प्रॉब्लम, जानिए टॉप मेडिकल कॉलेज के बारे में जहां आसानी से मिलेगा दाखिला

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): अगर आप भी NEET aspirant हैं और NEET परीक्षा की तैयारी के लिए दिन रात मेहनत कर रहे हैं, फिरभी आपके मन में यह सवाल हमेशा है कि अगर परीक्षा में आपका रैंक, टॉप स्कोरर में नहीं आया तो आपके लिए बेहतरीन कॉलेज के दरवाजे बंद हो जाएंगे, तो याह खबर आपके बड़े काम की है. अमूमन ऐसा कई लोग सोचते हैं कि  मेडिकल कॉलेज की लिस्ट में हमेशा हाई रैंक पाने वाले छात्रों को ही टॉप कॉलेज में पढ़ने का मौका मिलता है, पर ऐसा नहीं हैं. ऐसे में यहां हम बात करेंगे ऐसे कुछ कॉलेज के बारे में जहां टॉप रैंक ना आने के बाद भी आपका दाखिला अच्छे कॉलेजों में हो सकता है. 

दरअसल NEET UG में मनमुताबिक स्कोर नहीं आने के बाद कई छात्रों को लगता है कि अब सरकारी या अच्छे मेडिकल कॉलेज में MBBS की पढ़ाई का रास्ता बंद हो गया है. हालांकि ऐसा जरूरी नहीं है. काउंसलिंग के अलग-अलग चरणों, खासकर मॉप-अप और स्ट्रे वैकेंसी राउंड में कुछ सीटें खाली रह जाने पर कम स्कोर वाले उम्मीदवारों को भी एडमिशन का अवसर मिल सकता है. वहीं, कुछ प्राइवेट और डीम्ड मेडिकल संस्थानों में उपलब्ध सीटों और लागू एडमिशन नियमों के अनुसार कम स्कोर पर भी दाखिले की संभावना बन सकती है.

किन मेडिकल कॉलेजों पर रख सकते हैं नजर
कम स्कोर वाले उम्मीदवारों के लिए कुछ प्राइवेट और डीम्ड मेडिकल कॉलेज संभावित विकल्प हो सकते हैं. इनमें:
मणिपाल टाटा मेडिकल कॉलेज जमशेदपुर
KIMS भुवनेश्वर
SRM मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, चेन्नई
डॉ. डीवाई पाटिल मेडिकल कॉलेज, हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, पुणे
गिटाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च, विशाखापत्तनम
विनायक मिशन मेडिकल कॉलेज, कराईकल
वेल्स मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, तिरुवल्लुर
जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, बेलगाम
फैकल्टी ऑफ मेडिसिन एंड हेल्थ साइंसेज, SGT यूनिवर्सिटी, गुरुग्राम
RIMS इम्फाल 

कुछ प्राइवेट और डीम्ड संस्थानों में मैनेजमेंट कोटा भी MBBS एडमिशन का एक विकल्प हो सकता है. यहां सामान्य सरकारी सीटों की तुलना में फीस काफी ज्यादा हो सकती है. साथ ही मॉप-अप और स्ट्रे वैकेंसी राउंड में बची हुई सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा और पात्रता की शर्तें भी अलग हो सकती हैं. 

इसलिए काउंसलिंग के दौरान कॉलेज की फीस, सीट का प्रकार, हॉस्टल खर्च, अन्य शुल्क और परिवार की आर्थिक क्षमता का पूरा आकलन करना जरूरी है. साथ ही किसी भी कॉलेज में एडमिशन लेने से पहले संबंधित काउंसलिंग अथॉरिटी की आधिकारिक जानकारी और उस साल के नियम जरूर जांच लें. महत्‍वपूर्ण बात यह है कि हर कॉलेज में कटऑफ, सीटों की उपलब्धता, कैटेगरी, काउंसलिंग राउंड और उस वर्ष की प्रवेश प्रक्रिया अलग हो सकती है. इसलिए केवल पुराने कटऑफ के आधार पर एडमिशन की गारंटी मानना सही नहीं होगा.