शेखपुरा के घाट कुसुंभा को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र घोषित करने की मांग, महिलाओं ने प्रखंड कार्यालय में जड़ा ताला
शेखपुरा के घाट कुसुंभा को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र घोषित करने की मांग को लेकर महिलाओं ने प्रखंड सह अंचल कार्यालय का घेराव कर तालाबंदी की. एसडीएम और एसडीपीओ ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की.
शेखपुरा (SHEIKHPURA) : शेखपुरा जिले के घाट कुसुंभा प्रखंड को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र घोषित करने की मांग को लेकर स्थानीय लोगों का आंदोलन तेज हो गया है. बड़ी संख्या में महिलाओं ने प्रखंड सह अंचल कार्यालय का घेराव किया. हाथों में झाड़ू लेकर पहुंचीं महिलाओं ने कार्यालय में तालाबंदी कर प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया. आंदोलन को देखते हुए मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है.
चार दिनों से जारी है आमरण अनशन
घाट कुसुंभा क्षेत्र को बाढ़ प्रभावित घोषित करने की मांग को लेकर पिछले चार दिनों से आमरण अनशन भी जारी है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बाढ़ से प्रभावित लोगों की समस्याओं को देखते हुए प्रशासन और सरकार को जल्द निर्णय लेना चाहिए. आंदोलन के दौरान बीडीओ, सीओ और अन्य अधिकारियों को अनशन स्थल पर बैठाए जाने की बात भी सामने आई है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. उनका मुख्य आग्रह है कि क्षेत्र की मौजूदा स्थिति से राज्य सरकार को अवगत कराया जाए और घाट कुसुंभा को नियमानुसार बाढ़ प्रभावित क्षेत्र घोषित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए.
एसडीएम और एसडीपीओ पहुंचे अनशन स्थल
महिलाओं के प्रदर्शन और आंदोलन की स्थिति को देखते हुए एसडीएम प्रियंका कुमारी और एसडीपीओ डॉ. राकेश कुमार अनशन स्थल पर पहुंचे. दोनों अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया. हालांकि आंदोलनकारी अपनी मांग पर कायम रहे. एसडीपीओ डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और जिला प्रशासन एवं सरकार राहत और सहायता की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों की मांग पर प्रशासनिक स्तर से आवश्यक प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है.
राज्य सरकार और आपदा विभाग को भेजा गया पत्र
एसडीएम प्रियंका कुमारी ने बताया कि किसी क्षेत्र को बाढ़ प्रभावित घोषित करने के लिए निर्धारित मानक और प्रक्रिया होती है. जिलाधिकारी के स्तर से संबंधित मानकों के आधार पर राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग को पत्र भेजा गया है. सरकार से प्राप्त निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी. एसडीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान अधिकारियों को जबरन रोकने या कानून हाथ में लेने के मामलों की पहचान की जाएगी. जांच में जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है. फिलहाल प्रशासन आंदोलनकारियों से बातचीत कर स्थिति को सामान्य बनाने का प्रयास कर रहा है.