बिहार में राखी बाजार गुलजार, 9.50 लाख की राखी बनी आकर्षण, 300 करोड़ के कारोबार का अनुमान
रक्षाबंधन से पहले बिहार के बाजारों में राखी, मिठाई, ज्वेलरी और गिफ्ट की खरीदारी तेज हो गई है. पटना में 9.50 लाख रुपये तक की खास राखी चर्चा में है, जबकि पूरे राज्य में करीब 300 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान लगाया गया है.
Raksha Bandhan: रक्षाबंधन के त्योहार में बिहार के बाजारों की रौनक कई गुना बढ़ गई है. पटना सहित राज्य के प्रमुख शहरों में राखी, मिठाई, आभूषण और उपहार खरीदने वालों की भीड़ उमड़ रही है. इस बार पारंपरिक राखियों के साथ गोल्ड, सिल्वर, डिजिटल, पर्सनलाइज्ड और पर्यावरण के अनुकूल राखियां ग्राहकों का ध्यान खींच रही हैं.
9.50 लाख रुपये की राखी बनी चर्चा की विषय
पटना के ज्वेलरी बाजार में महंगी राखियों की विशेष मांग देखने को मिली है. 22 कैरेट सोने और डायमंड सॉलिटेयर से तैयार करीब 9.50 लाख रुपये की राखी इस बार सबसे ज्यादा चर्चा में है. इसके अलावा एक से डेढ़ ग्राम सोने और हीरे से बनी कई डिजाइनर राखियां लगभग 25 से 29 हजार रुपये की कीमत में पसंद की जा रही हैं.चांदी से बनी ब्रेसलेट स्टाइल राखियों का बाजार भी मजबूत रहा. इनकी खासियत यह है कि रक्षाबंधन के बाद भी इन्हें कड़े या ब्रेसलेट की तरह पहना जा सकता है. चांदी की राखियों की कीमत करीब 500 से 5,000 रुपये तक बताई जा रही है.
नई पीढ़ी को पसंद आ रही डिजिटल राखी
जेन जी और जेन अल्फा की पसंद को ध्यान में रखते हुए राखियों में तकनीक और पर्सनलाइजेशन का प्रयोग बढ़ा है. बाजार में ऐसी डिजिटल राखियां उपलब्ध हैं, जिनमें फोटो और वीडियो जैसे फीचर दिए जा रहे हैं. भाई के नाम, तस्वीर और खास संदेश वाली पर्सनलाइज्ड राखियां भी युवाओं को आकर्षित कर रही हैं.
इको-फ्रेंडली राखियों की बढ़ी मांग
पर्यावरण को लेकर बढ़ती जागरूकता का असर राखी बाजार पर भी दिख रहा है. बीज और जैविक सूती धागों से तैयार राखियां खास तौर पर पसंद की जा रही हैं. त्योहार के बाद इन्हें मिट्टी में बोया जा सकता है, जिससे पौधे उगाए जा सकते हैं.
300 करोड़ रुपये के कारोबार की उम्मीद
रक्षाबंधन ने राखी के साथ मिठाई, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, ज्वेलरी और रिटर्न गिफ्ट की बिक्री को भी रफ्तार दी है. व्यापारिक संगठन कैट ने बिहार में त्योहार से जुड़े कारोबार के करीब 300 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान जताया है. इस बार भद्रा का प्रभाव नहीं रहने और शुभ योग बनने से त्योहार को लेकर उत्साह और बढ़ा है. वहीं, ब्रह्माकुमारियों की ओर से मंत्रियों, अधिकारियों, दिव्यांग बच्चों और विभिन्न वर्गों के लोगों को राखी बांधकर भाईचारे और सद्भाव का संदेश भी दिया जा रहा है.